आवारा पशुओं का रैन बसेरा बना यह 2 करोड़ी आईटीआई भवन

Govind Pundir
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राजपाल सिंह गुसाईं

कंडीसौड़/नई टिहरी। टिहरी जनपद के विकासखंड थौलधार के अंतर्गत कंडीसौड़ का आईटीआई भवन पिछले दो सालों से आवारा पशुओं एवं बिहारी मजदूरों का रैन बसेरा बन गया है।  2 करोड़ से अधिक खर्च करने के बाबजूद उत्तर प्रदेश निर्माण निगम ने किस उद्देश्य से इस भवन का निर्माण किया समझ से परे है।

 

जहां इस प्रशिक्षण केंद्र में शिक्षित बेरोजगारों के लिए कंप्यूटर, सिलाई, बुनाई, प्लंबर, विद्युत ऑपरेटर आदि कक्षाएं चलनी थीं वह आवारा पशुओं का अड्डा बन गया है। वर्ष 2006 में ब्लॉक मुख्यालय में इसकी स्वीकृति मिली।  ब्लॉक के एक कमरे में 10 वर्ष तक केंद्र चला, मात्र एक ही ट्रेड। हुक्मरानों द्वारा बताया गया की जगह न होने के कारण आर्केड नहीं चलाए जा सकते हैं। 

वर्ष 2016 में 10 नाली भूमि निशुल्क पंचायत की भूमि कंडी गांव की ओर से दी गई थी। प्रथम चरण में 1 करोड़ रुपए से काम शुरू हुआ, दो मंजिला लेंटर पड़ते-पड़ते दो करोड़ रुपए खर्च किए गए।  लेकिन वर्ष 2017 से यह भवन आवारा पशुओं के लिए शासन प्रशासन ने छोड़ दियाहै।  यही नहीं आईटीआई स्कूल भी पूर्णतया बंद कर दिया गया और स्टाफ को इधर उधर भेज दिया गया। 

उत्तर प्रदेश से अलग हुए यह सपना हमने देखा था, अलग राज्य होगा तो क्षेत्र का विकास होगा। नई पीढ़ी के लिए रोजगार के साधन होंगे। रोजगार के बजाय इस आईटीआई भवन पर दीमक लग चुके हैं। लेकिन कोई भी हुक्मरान इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों का कहना है कि राजनीतिक रोटी सेंकने वाले बातें जरूर करते हैं कि हम आएंगे हमारी सरकार बनेगी तो हम संपूर्ण क्षेत्र के विकास करेंगे। 

आपको याद दिला दें कन्या हाईस्कूल पिछले 2 सालों से पूर्णरूप से बंद है। उत्तर प्रदेश के टाइम से खादी ग्राम उद्योग इकाई बंद, लोक निर्माण विभाग का अवर अभियंता कार्यालय बंद। आप सहज अंदाजा लगा सकते हैं उत्तराखंड अलग राज्य बनने के बाद नई नई इकाई खुलने के बजाय इसे पूर्णता है बंद कर दिया है। 

विकास के नाम पर झूठा दिलासा दिलाने वालों को यह समझ लेना होगा की जनता के पास और लाठी है जिसकी आवाज नहीं होती।

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*** संक्षिप्त परिचय / बायोडाटा *** नाम: गोविन्द सिंह पुण्डीर संपादक: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल टिहरी। उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार। पत्रकारिता अनुभव: सन 1978 से सतत सक्रिय पत्रकारिता। विशेषता: जनसमस्याओं, सामाजिक सरोकारों, संस्कृति एवं विकास संबंधी मुद्दों पर गहन लेखन और रिपोर्टिंग। योगदान: चार दशकों से अधिक समय से प्रिंट व सोशल मीडिया में निरंतर लेखन एवं संपादन वर्तमान कार्य: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान करना।
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