भगवान के आगमन से ही टूटते हैं जीवन के बंधन: राष्ट्रीय संत दुर्गेश आचार्य

टिहरी गढ़वाल। राष्ट्रीय संत दुर्गेश आचार्य ने कहा कि भगवान जब जीवन में आते हैं, तभी मनुष्य के समस्त सांसारिक बंधन स्वतः कट जाते हैं। उन्होंने कहा कि जब विश्व-ब्रह्मांड में साधक को सर्वत्र केवल भगवान ही दिखाई देने लगते हैं, तभी वह ‘वासुदेव’ कहलाता है। इसी प्रकार जब दृष्टि में देवभाव का उदय होता है, तब वही चेतना ‘देवकी’ बन जाती है।
राष्ट्रीय संत ने कहा कि वासुदेव-देवकी के जीवन चरित्र को अपनाने से ही भगवान श्रीकृष्ण जीवन में प्रकट होते हैं। प्रभु के आगमन से संसार की माया, जंजीरें और बेड़ियां स्वतः टूट जाती हैं। उन्होंने बताया कि तब इंद्रियों के द्वारपाल परम विश्राम में चले जाते हैं। इंद्रियां तब तक विषयों की ओर दौड़ती रहती हैं, जब तक प्रभु का साक्षात्कार नहीं होता। प्रभु दर्शन होते ही इंद्रियां परम शांति को प्राप्त कर प्रभु में ही लीन हो जाती हैं।

संत दुर्गेश आचार्य ने आध्यात्मिक उपमा देते हुए कहा कि जब इंद्रियां प्रभु में समा जाती हैं, तब यह शरीर स्वयं गोकुल बन जाता है, जहां इंद्रिय रूपी गोपियां प्रभु-प्रेम में लीन हो जाती हैं। ऐसी अवस्था में सम्पूर्ण जीवन ही वृंदावन धाम का स्वरूप धारण कर लेता है।
उन्होंने कहा कि भौतिकवादी युग में यदि मनुष्य प्रभु के इस पावन संदेश को अपने जीवन में उतार ले, तो जीव परमानंद ब्रह्म की प्राप्ति कर सकता है। संत के इस दिव्य उपदेश से श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और वातावरण पूर्णतः भक्तिमय हो गया।
इस मौके पर नगर पालिका अध्यक्ष चम्बा श्रीमती शोभनी धनोला, नगर पालिका अध्यक्ष टिहरी मोहन सिंह रावत, पत्रकार गोविंद सिंह पुंडीर, श्रीमती शैला बेलवाल, श्रीमती सोनम भंडारी, श्रीमती रामदेई रावत,श्रीमती रंजीता थपलियाल, श्रीमती अनीता थपलियाल,श्रीमती रचना उनियाल, श्री महावीर उनियाल, श्री योगेश कोठारी (चंबा), श्री राजेंद्र सेमवाल तथा आचार्य कृष्ण मिश्रा सहित अनेक गणमान्य नागरिक और श्रद्धालु उपस्थित रहे।



