उत्तराखंड को मिले पांचवीं अनुसूची का लाभ: संयुक्त संघर्ष समिति की गोष्ठी में पारित प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा जाएगा

टिहरी गढ़वाल, 1 फरवरी 2026: संविधान की पांचवीं अनुसूची को उत्तराखंड में लागू करने की मांग तेज हो गई है। उत्तराखंड संयुक्त संघर्ष समिति की पहल पर आयोजित गोष्ठी में विभिन्न संगठनों ने एकजुट होकर प्रस्ताव पारित किया, जिसमें राज्य को पांचवीं अनुसूची का लाभ दिलाने और खस जनजाति को मान्यता देने की मांग की गई। यह प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा जाएगा।
गोष्ठी के मुख्य वक्ता उत्तराखंड एकता मंच के संयोजक अनूप बिष्ट ने पांचवीं अनुसूची की अवधारणा, संवैधानिक व्यवस्था और उत्तराखंड में इसे लागू करने की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश के वे क्षेत्र जहां भौगोलिक-सांस्कृतिक पहचान सदियों से अलग रही हो, खासकर जल-जंगल-जमीन पर निर्भर समुदायों के लिए यह व्यवस्था कारगर साबित हो सकती है।
बिष्ट ने देश के विभिन्न हिस्सों में लागू पांचवीं अनुसूची के उदाहरण दिए और बताया कि उत्तराखंड में भी इसे जनजातीय आधार पर लागू किया जा सकता है। उन्होंने मूल निवासी भू-कानून और जल-जंगल-जमीन के अधिकारों के लिए एकजुट आवाज उठाने का आह्वान किया।
चर्चा में नागरिक मंच के सदस्यों, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच के अध्यक्ष ज्योति प्रसाद भट्ट, भूमिहार जागृति मंच के अमित पंत व देवेंद्र नौटियाल, नागरिक मंच के भगवान चंद रमोला सहित अन्य वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए।
अंत में नगर पालिका अध्यक्ष मोहन सिंह रावत ने शहर व राज्य विकास के लिए दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट सहयोग की अपील की।
गोष्ठी में नागरिक मंच ने घोषणा की कि वह अलग से प्रस्ताव पारित कर जिलाधिकारी के माध्यम से भारत सरकार को भेजेगा। राज्य आंदोलनकारी मंच ने भी ऐसा ही कदम उठाने पर विचार करने की बात कही।
गोष्ठी में नागरिक मंच, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच, रामलीला समिति, व्यापार मंडल, भूतपूर्व कर्मचारी संगठन, भू-भूम्याल जागृति मंच, जिला बार एसोसिएशन आदि ने भाग लिया।
संयुक्त संघर्ष समिति के जिला संयोजक डॉ. राकेश भूषण गोदियाल ने गोष्ठी का संचालन किया।



