विश्व कैंसर दिवस पर विशेष

@ सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’।
कैंसर एक खतरनाक बीमारी है। आंकड़ों के मुताबिक लगभग 70 लाख से अधिक लोग प्रति वर्ष कैंसर की बीमारी से मरते हैं। यह अनेक प्रकार से जीवन के लिए त्रासदी बनकर आता है। अगर समय पर कैंसर के लक्षणों का पता चल जाए तो इस घातक बीमारी को टाला जा सकता है।
सन 1933 में पहली बार जागरूकता हेतु विश्व कैंसर दिवस मनाया गया और प्रति वर्ष चार फरवरी को यह विश्व भर में मनाया जाता है। इस घातक बीमारी के कारण व्यक्ति व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक क्षति पहुंचती है। यह कष्टदाई रोग व्यक्ति को यदि लग गया तो उभरने में काफी वक्त लगता है।
कैंसर किसी भी प्रकार का हो शरीर के लिए हानिकारक है। गले का कैंसर, पैंक्रियाज का कैंसर, लीवर का कैंसर, त्वचा का कैंसर, फेफड़े का कैंसर, स्तन कैंसर, आंतों का कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर आदि अनेक प्रकार हैं।
यह व्याधि आदिकाल से चली आ रही है लेकिन वर्तमान में उचित आहार- विहार न होने के कारण यह जानलेवा रोग अकाल मौत का कारण बनता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन इस घातक बीमारी को काबू करने के लिए प्रयासरत है और प्रत्येक देश की सरकार इस बीमारी से निजात पाने के लिए भरसक प्रयास करती हैं।
बीमारी के लक्षण आरंभ में ही पता लगे तो काफी हद तक इस बीमारी को टाला जा सकता है। अनेक प्रकार के दवाइयां, सर्जरी तथा थेरेपियां इसके इलाज में प्रयुक्त की जाती हैं। रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी आदि प्रमुख हैं। अधिकांशतः रोग से उबरने के बाद भी प्रतिरोधात्मक क्षमता कम होने के कारण अकाल मौत का कारण भी बन सकता है।
सामान्यतः इसके के निदान हेतु व्यक्ति स्वयं भी कुछ प्रयास कर सकता है। जैसे- नमक और चीनी का परहेज, जंक फूड से परहेज, गंदगी युक्त और अभक्ष्य पदार्थों के सेवन से दूरी, तंबाकू, शराब आदि से परहेज करना जरूरी है।
रोग के लक्षण महसूस होते ही व्यक्ति को चिकित्सकीय परामर्श करना चाहिए। गुनगुने पानी के साथ नींबू रस सेवन से कमी लाई जा सकती है।जामुन फल आदि का प्रयोग करना उचित माना गया है। पूर्व में यह बड़ी लाईलाज बीमारी थी लेकिन अब ईलाज संभव है। यदि व्यक्ति को समय समय रहते उचित ईलाज मिल गया तो लंबी जिंदगी जी सकता है।
विश्व कैंसर दिवस की थीम भी यही है कि जागरूकता के द्वारा इस कष्टप्रद बीमारी से बचा जा सकता है।जन सामान्य को जागरूक किया जाए। स्वास्थ्य विभाग इसके समूल उन्मूलन के लिए प्रयासरत है। शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के कारण भी काफी हद तक की बीमारी को टाला जा सकता है।



