टिहरी बांध निर्माण में विस्थापितों का अतुलनीय योगदान: भगत सिंह कोशियारी

देहरादून। राष्ट्र की ऊर्जा, सिंचाई और पेयजल आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली टिहरी बांध परियोजना के निर्माण में बांध विस्थापितों और प्रभावितों के त्याग को पूर्व मुख्यमंत्री Bhagat Singh Koshyari ने ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गंगा के धरती पर अवतरण के लिए राजा भगीरथ की कठिन तपस्या की थी, उसी प्रकार टिहरी में भागीरथी और भिलंगना नदियों के संगम पर निर्मित बहुउद्देशीय टिहरी बांध परियोजना के पीछे विस्थापितों का त्याग और समर्पण ही सबसे बड़ी शक्ति रहा है।
देहरादून स्थित टिहरी स्मृति एवं विस्थापित एकता मंच के कार्यकारी अध्यक्ष सुबोध बहुगुणा के आवास पर आयोजित एक निजी समारोह में उन्होंने कहा कि अपने पुरखों की संजोई हुई मातृभूमि को राष्ट्रहित में समर्पित करना कोई साधारण कार्य नहीं है। टिहरी बांध विस्थापितों ने जो त्याग किया है, वह सदैव स्मरणीय रहेगा। उन्होंने कहा कि टिहरी निवासियों से समय-समय पर प्राप्त स्नेह और सम्मान के लिए वे हृदय से कृतज्ञ हैं।
इस अवसर पर कोशियारी ने विभागीय सेवा से सेवानिवृत्त हुए सुबोध बहुगुणा को शुभकामनाएं दीं तथा नवयुगल श्री सुकांत बहुगुणा एवं श्रीमती नीमा बहुगुणा को विवाह वर्षगांठ पर आशीर्वाद प्रदान किया।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सुबोध बहुगुणा द्वारा अपने आवास पर निर्मित “एक थी टिहरी” की प्रतिकृति का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि यह प्रयास ऐतिहासिक पुरानी टिहरी शहर की स्मृतियों को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
समारोह में राज्य सरकार में दायित्वधारी राज्य मंत्री स्तर एवं टिहरी स्मृति एवं विस्थापित एकता मंच की अध्यक्ष श्रीमती बिनोद उनियाल सहित विनोद बहुगुणा, प्रमोद बहुगुणा, विमल पैन्यूली, प्राची जुयाल, वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप बहुगुणा, राजीव उनियाल, कान्ता बहुगुणा तथा टिहरी बांध विस्थापित, प्रभावित एवं पुनर्वासित जनसंयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष दिनेश डोभाल, उपाध्यक्ष विजय बिष्ट, प्रताप सिंह राणा, बेताल सिंह नेगी, सरोप सिंह नयाल, शशांक, अजय, मधुकर उनियाल, रविंद्र डोभाल, सुनील सकलानी, विमल बहुगुणा, सतीश द्विवेदी, अजय कान्त शर्मा समेत अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।



