भागवत कथा जीवन संवारने का मार्ग: डॉ दुर्गेश आचार्य

टिहरी गढ़वाल। जनपद के भिंगार्की गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का यूट्यूब पर सीधा प्रसारण किया जा रहा है। कथा का वाचन परम पूज्य सद्गुरु ब्रह्म ऋषि राष्ट्रीय संत डॉ. दुर्गेशाचार्य महाराज के श्रीमुख से प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक किया जा रहा है।
राष्ट्रीय संत डॉ. दुर्गेश आचार्य ने कहा कि भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली अमृतमयी कथा है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें सिखाता है कि सत्ता और वैभव प्राप्त होने के बाद भी विनम्रता और सेवा भाव नहीं छोड़ना चाहिए।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि श्रीकृष्ण ने द्वारिका के राजा बनने के बाद भी अपने बाल सखा सुदामा को नहीं भुलाया। सुदामा जैसे निर्धन मित्र को उन्होंने अपने सिंहासन पर बैठाकर सम्मान दिया और उनकी सेवा कर यह संदेश दिया कि सच्चा महान वही है जो गरीब और जरूरतमंदों का सहारा बने।
संत ने कहा कि आज समाज में सम्पन्न वर्ग को भी श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपनाना चाहिए और गरीबों व असहाय लोगों की मदद के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने भागवत कथा के गूढ़ अर्थ पर प्रकाश डालते हुए बताया कि श्रीकृष्ण की 16,108 रानियों का आध्यात्मिक अर्थ मानव शरीर की अनेक इंद्रियों और चेतनाओं से है, जो अंततः परमात्मा में लीन हो जाती हैं।
उन्होंने कहा कि जीवन के अंतिम समय में जब मनुष्य काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे विकारों से मुक्त हो जाता है, तब वह परमात्मा की प्राप्ति कर सकता है। भागवत कथा इसी आत्मशुद्धि और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और कथा का श्रवण कर आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया। संत ने अंत में कहा कि आज के अशांत जीवन में भागवत कथा ही मन को शांति, संतुलन और सच्चे आनंद की ओर ले जाने का सशक्त माध्यम है।



