“व्यवस्थाएं पानी में डूब गईं… सिस्टम सवालों में घिर गया… लेकिन टिहरी की रामलीला फिर भी नहीं रुकी।” 🚩
टिहरी गढ़वाल। बौराड़ी स्टेडियम में आयोजित ऐतिहासिक रामलीला के 8वें दिन हुई भारी बारिश ने स्टेडियम के विस्तारीकरण कार्यों और सरकारी व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर स्टेडियम का पुनर्निर्माण और विस्तारीकरण किया गया, लेकिन जल निकासी की स्थायी व्यवस्था आज तक नहीं बन पाई। नतीजा यह रहा कि बारिश होते ही पूरा मैदान और टेंट पानी से भर गया और श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
रामलीला समिति के अध्यक्ष देवेंद्र नौडियाल और स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि सरकारी धन खर्च होने के बावजूद मूलभूत समस्या जस की तस बनी हुई है। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य सही योजना और दूरदृष्टि के साथ किया गया होता तो हर बारिश में स्टेडियम तालाब में तब्दील नहीं होता।
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बारिश के बाद जहां जिम्मेदार विभाग और प्रशासन मौके पर सक्रिय नजर नहीं आए, वहीं रामलीला समिति के कार्यकर्ता खुद मैदान में उतर पड़े। समिति के सदस्य पानी निकालने, सटरिंग बिछाने और श्रद्धालुओं के लिए रास्ता तैयार करने में देर रात तक जुटे रहे ताकि रामलीला का मंचन बाधित न हो।
इधर, जब गढ़ निनाद ने जिला युवा कल्याण अधिकारी पंकज तिवारी से इस संबंध में जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि स्टेडियम के ड्रेनेज सिस्टम के निर्माण हेतु कार्यदायी संस्था कोऑपरेटिव निगम द्वारा शासन को आगणन भेजा गया है। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद ड्रेनेज संबंधी कार्य कराया जाएगा।
हालांकि स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब स्टेडियम का विस्तारीकरण पहले ही हो चुका था, तब ड्रेनेज जैसी मूलभूत आवश्यकता को नजरअंदाज क्यों किया गया। लोगों का कहना है कि बारिश ने निर्माण कार्यों की कमियों और विभागीय लापरवाही को उजागर कर दिया है।
इसके बावजूद रामभक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। “जय श्रीराम” के जयघोष के साथ समिति के कार्यकर्ता लगातार व्यवस्थाएं संभालते रहे।
“व्यवस्थाएं पानी में डूब गईं… सिस्टम सवालों में घिर गया… लेकिन टिहरी की रामलीला फिर भी नहीं रुकी।” 🚩




