टिहरी गढ़वाल 16 जुलाई। उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला के अवसर पर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नई टिहरी में गुरुवार को उत्साहपूर्वक वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। महाविद्यालय परिसर में छायादार एवं फलदार प्रजातियों के पौधे रोपकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में प्राध्यापकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए पौधों के संरक्षण का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. प्रीति कुमारी ने किया। उन्होंने सभी को हरेला पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हरेला केवल एक पारंपरिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी आस्था, संस्कृति और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग जैसी चुनौतियों के दौर में हरेला जैसे लोकपर्व हमें प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।
‘हरेला पर्व की उपयोगिता और प्रासंगिकता’ विषय पर अपने संबोधन में प्राचार्य ने युवाओं से आह्वान किया कि केवल पौधारोपण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पौधों की नियमित देखभाल कर उन्हें वृक्ष बनाना भी प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर महाविद्यालय परिवार ने परिसर को अधिक हरा-भरा बनाने के उद्देश्य से विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए तथा उनके संरक्षण और नियमित देखभाल की सामूहिक शपथ भी ली।
कार्यक्रम में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी श्रद्धानंद सेमवाल, प्रो. राजकुमार त्यागी, प्रो. डी.पी.एस. भंडारी, डॉ. राजपाल रावत, डॉ. रजनी गुसाईं, डॉ. हर्षिता जोशी, डॉ. अरविंद सिंह रावत, डॉ. पी.सी. पैनुली, डॉ. अनिल भट्ट, डॉ. हिमानी पंत, डॉ. नूर हसन सहित महाविद्यालय के प्राध्यापक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष प्रदीप प्रसाद, युवराज सिंह एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।




