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वन संरक्षण और सैन्य गतिविधियों में संतुलन पर FRI में प्रशिक्षण शुरू, 47 सैन्य अधिकारी-कर्मी हुए शामिल

Govind Pundir
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देहरादून, 10 जुलाई। वन अनुसंधान संस्थान (FRI) देहरादून में शुक्रवार को “वन पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण एवं सतत प्रबंधन” विषय पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। संस्थान की निदेशक ऋचा मिश्रा (आईएफएस) ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। प्रशिक्षण में भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल मनोज गुरुंग, मेजर पी.सी. मिश्रा सहित कुल 47 सैन्य अधिकारी एवं कर्मी भाग ले रहे हैं।
उद्घाटन अवसर पर निदेशक ऋचा मिश्रा ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना जहां देश की सीमाओं की रक्षा करती है, वहीं वन जलवायु संतुलन बनाए रखने, जैव विविधता के संरक्षण और आजीविका को सहारा देने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में रक्षा तैयारियों और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलित दृष्टिकोण विकसित करना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य सैन्य कर्मियों को उन पारिस्थितिक पहलुओं के प्रति संवेदनशील बनाना है, जिनका सामना उन्हें संवेदनशील वन क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियों के दौरान करना पड़ता है। प्रशिक्षण में फायरिंग रेंज के आसपास वनस्पतियों एवं वन्यजीवों की पहचान, वन्यजीवों के प्रजनन काल में बरती जाने वाली सावधानियां, प्रदूषण नियंत्रण तथा क्षतिग्रस्त वन भूमि के पुनर्स्थापन जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी जा रही है।
कार्यक्रम के दौरान एफआरआई के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक एन. बाला ने क्षतिग्रस्त वन भूमि के पुनर्स्थापन (इको-रेस्टोरेशन) पर व्याख्यान दिया। वहीं जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, कोलकाता के वैज्ञानिक डॉ. ललित कुमार शर्मा ने सैन्य फायरिंग रेंज में पाए जाने वाले प्रमुख वन्यजीवों के व्यवहार, प्रजनन संबंधी चुनौतियों और आवश्यक सावधानियों पर विस्तृत जानकारी दी। विशेषज्ञों ने जैव विविधता संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं, इको-रेस्टोरेशन तथा मिट्टी, जल और वायु पर सैन्य गतिविधियों के प्रभाव को कम करने के उपायों पर भी तकनीकी सत्र आयोजित किए।
कार्यक्रम में एफआरआई के ग्रुप कोऑर्डिनेटर (रिसर्च) डॉ. डी.पी. खली, प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर डॉ. वी.पी. पंवार, पब्लिसिटी एवं लाइज़निंग ऑफिसर डॉ. तारा चंद सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, वैज्ञानिक और वन पारिस्थितिकी एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के तकनीकी विशेषज्ञ उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।


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*** संक्षिप्त परिचय / बायोडाटा *** नाम: गोविन्द सिंह पुण्डीर संपादक: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल टिहरी। उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार। पत्रकारिता अनुभव: सन 1978 से सतत सक्रिय पत्रकारिता। विशेषता: जनसमस्याओं, सामाजिक सरोकारों, संस्कृति एवं विकास संबंधी मुद्दों पर गहन लेखन और रिपोर्टिंग। योगदान: चार दशकों से अधिक समय से प्रिंट व सोशल मीडिया में निरंतर लेखन एवं संपादन वर्तमान कार्य: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान करना।
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