POCSO कोर्ट का फैसला: दोषी पर ₹2.20 लाख जुर्माना, पीड़िता को ₹3 लाख प्रतिकर
टिहरी गढ़वाल 13 अगस्त। नाबालिग बालिका को बहला-फुसलाकर ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में टिहरी गढ़वाल की विशेष POCSO अदालत ने दोषी नूर आलम को 24 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश (POCSO)/जिला एवं सत्र न्यायाधीश नितिन शर्मा की अदालत ने दोषी पर कुल 2.20 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
अदालत ने POCSO अधिनियम की धारा 5(एल) सहपठित धारा 6 के तहत 24 वर्ष का कठोर कारावास और दो लाख रुपये अर्थदंड, जबकि भारतीय दंड संहिता की धारा 363 के तहत सात वर्ष का कठोर कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड सुनाया। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
* पीड़िता को मिलेगा तीन लाख रुपये प्रतिकर*
अदालत ने पीड़िता के पुनर्वास एवं हुई क्षति को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार को तीन लाख रुपये प्रतिकर देने का आदेश दिया है। यह राशि निर्णय की तारीख से 30 दिनों के भीतर पीड़िता के बचत खाते में जमा कराई जाएगी। प्रतिकर की यह राशि दोषी पर लगाए गए अर्थदंड से अलग होगी।
11 गवाहों ने दी गवाही
मामले की सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक महेंद्र सिंह बिष्ट ने अभियोजन की ओर से 11 गवाह न्यायालय में प्रस्तुत किए। अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया।
मोबाइल लेकर परिवार से किया था संपर्क से वंचित
अदालत के निर्णय के अनुसार, दोषी ने नाबालिग को बहला-फुसलाकर अपने कब्जे में लिया और अलग-अलग स्थानों पर उसके साथ गंभीर लैंगिक अपराध किया। आरोपी ने पीड़िता का मोबाइल फोन भी अपने पास रख लिया और सिम तोड़ दिया था, जिससे वह परिजनों से संपर्क नहीं कर पा रही थी। पुलिस की तत्परता से पीड़िता को आरोपी के कब्जे से बरामद किया गया।
मृत्युदंड के बजाय 24 वर्ष की सजा
अदालत ने अपराध की गंभीरता और पीड़िता की कम आयु को देखते हुए मामले को गंभीर प्रकृति का माना। हालांकि, उपलब्ध तथ्यों एवं परिस्थितियों के आधार पर इसे मृत्युदंड के लिए अत्यंत विरल श्रेणी का मामला नहीं माना गया। अदालत ने आजीवन कारावास के बजाय 24 वर्ष के कठोर कारावास को न्यायोचित दंड माना।
अदालत ने आरोपी द्वारा जिला कारागार नई टिहरी में पूर्व में बिताई गई अवधि का समायोजन दंडादेश में करने का आदेश दिया है। साथ ही आरोपी को फैसले के विरुद्ध उत्तराखंड उच्च न्यायालय में अपील का अधिकार भी बताया गया है।
फैसला 13 अगस्त 2026 को विशेष न्यायाधीश (POCSO)/जिला एवं सत्र न्यायाधीश नितिन शर्मा की अदालत ने सुनाया।





