संवाद से सुलझ सकते हैं पारिवारिक विवाद : एसएसपी
ऐच्छिक ब्यूरो की बैठक में छह पारिवारिक प्रकरणों पर हुई सुनवाई, संवाद से सुलझाए मतभेद
टिहरी गढ़वाल 12 अगस्त। पारिवारिक विवादों को कानूनी प्रक्रिया में जाने से पहले आपसी संवाद और समझाइश के माध्यम से सुलझाने की दिशा में टिहरी पुलिस की पहल सकारात्मक परिणाम दे रही है।
बुधवार को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्रीमती श्वेता चौबे की अध्यक्षता में पुलिस कार्यालय नई टिहरी के सभागार में ऐच्छिक ब्यूरो की काउंसलिंग बैठक आयोजित की गई। बैठक में छह पारिवारिक विवादों से जुड़े प्रकरणों की सुनवाई की गई, जिनमें चार मामलों में दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति और समझौता कराकर परिवारों को टूटने से बचाने में सफलता मिली।
काउंसलिंग के दौरान संबंधित पक्षों और उनके परिजनों से विस्तार से बातचीत कर विवाद के कारणों और आपसी मतभेदों को समझा गया। ऐच्छिक ब्यूरो के सदस्यों ने दोनों पक्षों को आपसी विश्वास, सम्मान, संवाद और सामंजस्य बनाए रखने के लिए समझाया। सकारात्मक माहौल में हुई बातचीत के बाद चार प्रकरणों में दोनों पक्ष साथ रहने के लिए सहमत हुए।
वहीं एक प्रकरण न्यायालय से संबंधित होने के कारण समाप्त कर दिया गया, जबकि एक अन्य मामले में विपक्षी पक्ष के उपस्थित नहीं होने के कारण अगली तिथि निर्धारित की गई।
संवाद से सुलझ सकते हैं पारिवारिक विवाद : एसएसपी
एसएसपी श्रीमती श्वेता चौबे ने कहा कि पारिवारिक विवादों का समाधान केवल कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से ही नहीं, बल्कि आपसी संवाद, संवेदनशीलता, समझाइश और सकारात्मक काउंसलिंग से भी संभव है। ऐच्छिक ब्यूरो का उद्देश्य परिवारों में उत्पन्न मतभेदों को दूर कर आपसी विश्वास और सौहार्द कायम करना है, ताकि जहां संभव हो, परिवारों को टूटने से बचाया जा सके।
हर माह होगी ऐच्छिक ब्यूरो की बैठक
पुलिस कार्यालय के सभागार में ऐच्छिक ब्यूरो की बैठक प्रत्येक माह आयोजित की जाएगी। इसमें पारिवारिक विवादों से जुड़े मामलों की सुनवाई और काउंसलिंग के माध्यम से दोनों पक्षों के बीच सहमति एवं सामंजस्य स्थापित कराने का प्रयास किया जाएगा।
ऐच्छिक ब्यूरो में एसएसपी श्रीमती श्वेता चौबे अध्यक्ष, पुलिस उपाधीक्षक टिहरी श्री चंद्रमोहन, मनोवैज्ञानिक डॉ. रीना सिंह, शिक्षाविद् डॉ. रंजना सिंह, अधिवक्ता श्री देवेंद्र दुमोगा तथा महिला पुलिस अधिकारी मउनि हेमलता सदस्य हैं।
टिहरी पुलिस का संदेश है—‘विवाद नहीं, संवाद; दूरी नहीं, परिवारों को जोड़ना।’





