उच्चस्तरीय टीम ने किया स्थलीय निरीक्षण, 12 सितंबर की बोर्ड बैठक में रखा जाएगा प्रस्ताव
आदिबदरी 7 सितम्बर । पौराणिक, धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व के आदिबदरी मंदिर समूह को बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) में शामिल करने की कवायद तेज हो गई है। इसी क्रम में बीकेटीसी की भूसंपत्ति उपसमिति की उच्चस्तरीय टीम ने उपाध्यक्ष एवं भूसंपत्ति उपसमिति के अध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती के नेतृत्व में आदिबदरी मंदिर पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण किया और मंदिर समिति के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी ली।
क्षेत्रीय जनता और आदिबदरी मंदिर प्रबंध समिति लंबे समय से मंदिर समूह को बीकेटीसी में शामिल करने की मांग करती आ रही है। इस संबंध में मंदिर समिति और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की ओर से मुख्यमंत्री, बीकेटीसी अध्यक्ष एवं मुख्य कार्याधिकारी को पत्र भेजे गए थे। इसी के क्रम में पहुंची टीम ने मंदिर की पूजा-पद्धति एवं व्यवस्थाओं, भूसंपत्ति, हक-हकूकधारियों, मंदिर से जुड़े धार्मिक आयोजनों और अन्य व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी ली।
बैठक में बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने कहा कि आदिबदरी मंदिर समिति, स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अनुरोध और क्षेत्र की जनभावनाओं को देखते हुए मंदिर समूह को बीकेटीसी में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भूसंपत्ति उपसमिति द्वारा तैयार स्थलीय निरीक्षण रिपोर्ट तथा मंदिर समिति एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ हुई वार्ता का विवरण 12 सितंबर को ऋषिकेश में होने वाली बीकेटीसी बोर्ड बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा। बैठक में आदिबदरी मंदिर समूह को बीकेटीसी में शामिल करने का प्रस्ताव रखा जाएगा। बोर्ड के निर्णय के बाद ही आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
निरीक्षण के बाद आदिबदरी मंदिर प्रबंध समिति की ओर से बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती सहित भूसंपत्ति उपसमिति के सदस्यों को आदिबदरी मंदिर समूह का चित्र भेंट किया गया। इससे पूर्व मंदिर समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने टीम का फूल-मालाओं से स्वागत किया।
बैठक में बीकेटीसी सदस्य दिनेश डोभाल, धीरज पंचभैय्या (मोनू), डॉ. विनीत पोस्ती, भूसंपत्ति उपसमिति के सचिव एवं अवर अभियंता गिरीश रावत, प्रभारी संपत्ति निरीक्षक कुलदीप बिष्ट, आदिबदरी मंदिर समिति अध्यक्ष जगदीश बहुगुणा, कोषाध्यक्ष विजय चमोला, नवीन बहुगुणा, मंदिर के पुजारी, ग्राम प्रधान सहित मंदिर समिति के पदाधिकारी, सदस्य एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।




