चंडीगढ़, 7 सितंबर। ब्रह्मलीन ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम महाराज की जन्म जयंती नृसिंह वाटिका आश्रम, सेक्टर-40 में भावपूर्ण एवं उत्साहपूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के भावगान से हुई। इसके पश्चात महिला संकीर्तन मंडल द्वारा भव्य कीर्तन प्रस्तुत किया गया तथा श्रद्धालुओं के लिए गुरु सेवा लंगर का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर ब्रह्मलीन स्वामी माधवाश्रम महाराज के परम शिष्य एवं उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने उनके जीवन एवं कार्यों को स्मरण करते हुए कहा कि स्वामी माधवाश्रम महाराज ने वेद-वेदांत के प्रचार-प्रसार, सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन, रोटी-बेटी-चोटी की परंपरा को मजबूत करने तथा गौ रक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने कहा कि स्वामी माधवाश्रम महाराज का जीवन समाज एवं राष्ट्र को सनातन मूल्यों से जोड़ने के लिए समर्पित रहा।
स्वामी रसिक महाराज ने भारत सरकार से मांग उठाई कि ब्रह्मलीन स्वामी माधवाश्रम महाराज के सनातन धर्म एवं संस्कृति के क्षेत्र में किए गए योगदान को देखते हुए उन्हें भविष्य में पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया जाए। साथ ही उनके नाम पर सनातन धर्म संस्कृति शोध संस्थान स्थापित किया जाए, जिससे वेद-वेदांत, सनातन संस्कृति और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध एवं अध्ययन को संस्थागत रूप से बढ़ावा मिल सके।
कार्यक्रम में वैदिक शोध संस्थान, तिरुचनापल्ली, तमिलनाडु के डायरेक्टर श्री मलाई गोस्वामी, साध्वी मां देवेश्वरी, डॉ. अमृत कौर नागर, प्रसिद्ध समाजसेवी एवं पर्यावरणविद् शशांक अग्निहोत्री, आचार्य डॉ. केवल कृष्ण जोशी सहित बड़ी संख्या में विद्वतजन, संत-महात्मा एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
वक्ताओं ने स्वामी माधवाश्रम महाराज के आध्यात्मिक एवं सामाजिक योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने तथा सनातन धर्म, संस्कृति, गौ संरक्षण और भारतीय जीवन मूल्यों के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति एवं गुरु स्मरण के वातावरण में संपन्न हुआ।




