रायवाला 19 अक्टूबर । नवरात्र की अष्टमी एवं नवमी के पावन अवसर पर रायवाला स्थित नृसिंह वाटिका आश्रम में मां भगवती की आराधना, धार्मिक अनुष्ठान एवं सरस्वती विसर्जन के समापन अवसर पर आध्यात्मिक वातावरण भक्तिमय बना रहा।
इस अवसर पर सनातन धर्म विकास परिषद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने अपने प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कार, ज्ञान, भक्ति और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया।
स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि नवरात्र केवल मां दुर्गा की उपासना का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, साधना, संयम और नारी शक्ति के सम्मान का भी महापर्व है। मां भगवती की कृपा से मनुष्य के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, विवेक और सदाचार का संचार होता है। उन्होंने कहा कि मां सरस्वती ज्ञान, विद्या, विवेक और संस्कारों की अधिष्ठात्री देवी हैं। उनके आशीर्वाद से ही व्यक्ति अज्ञान के अंधकार से निकलकर ज्ञान के प्रकाश की ओर अग्रसर होता है।
महाराज श्री ने अपने प्रवचन में कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति में धार्मिक पर्वों का उद्देश्य समाज को आध्यात्मिक चेतना से जोड़ना तथा नई पीढ़ी को अपने संस्कारों और परंपराओं से परिचित कराना है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे धर्म और अध्यात्म को अपने जीवन में आत्मसात करते हुए सेवा, सद्भाव, परोपकार एवं राष्ट्रहित के कार्यों में योगदान दें।
नवरात्र के समापन अवसर पर मां भगवती के चरणों में विश्व कल्याण, सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की कामना की गई। आश्रम में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम ने श्रद्धालुओं को भक्ति एवं आध्यात्मिक चिंतन की प्रेरणा प्रदान की।
कार्यक्रम का समापन मां भगवती एवं मां सरस्वती के प्रति श्रद्धा निवेदन तथा सनातन धर्म की महान परंपराओं को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ।




