जल संरक्षण और हिमालयी पर्यावरण बचाने का विद्यार्थियों ने लिया संकल्प, दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न

Govind Pundir
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नमामि गंगे अभियान के तहत बाल गंगा महाविद्यालय में विशेषज्ञों ने जल प्रदूषण, प्लास्टिक कचरे और संतुलित विकास पर किया जागरूक

घनसाली। बाल गंगा महाविद्यालय, सेंदुल (केमर) में नमामि गंगे अभियान के तहत जल संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, हिमालयी संस्कृति एवं पर्यावरण संतुलित विकास विषय पर आयोजित दो दिवसीय जागरूकता कार्यशाला का समापन हो गया। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को गंगा और उसकी सहायक नदियों के संरक्षण, जल प्रदूषण, प्लास्टिक कचरे के दुष्प्रभाव तथा हिमालयी पर्यावरण की चुनौतियों से अवगत कराते हुए इनके संरक्षण में जनभागीदारी की आवश्यकता बताई।
कार्यशाला में डॉ. राकेश रतूड़ी ने जल प्रदूषण एवं कीटनाशकों के दुष्प्रभाव पर व्याख्यान देते हुए कहा कि कृषि में रासायनिक कीटनाशकों और उर्वरकों के अनियंत्रित इस्तेमाल से मिट्टी और जल स्रोत प्रदूषित हो रहे हैं। इसका सीधा प्रतिकूल प्रभाव नदियों, जलीय जीवों और मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। उन्होंने जैविक खेती को बढ़ावा देने और प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण पर जोर दिया।
डॉ. हेमंत ध्यानी ने हिमालयी संस्कृति, पर्यावरण एवं संतुलित विकास पर विचार रखते हुए कहा कि हिमालय प्राकृतिक संपदा के साथ ही हमारी सांस्कृतिक विरासत और जीवनदायिनी नदियों का उद्गम स्थल है। इसलिए हिमालयी क्षेत्रों में विकास योजनाएं स्थानीय संस्कृति, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को ध्यान में रखकर संचालित की जानी चाहिए।
डॉ. जितेंद्र डोभाल ने गंगा एवं हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण को गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि प्लास्टिक कचरा नदियों, जलधाराओं और प्राकृतिक पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने प्लास्टिक का उपयोग कम करने, कचरे का उचित निस्तारण करने और नदी घाटियों को स्वच्छ रखने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बीसी उनियाल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। उन्होंने विद्यार्थियों से जल संरक्षण, स्वच्छता और पर्यावरण संतुलन के प्रति स्वयं जागरूक रहने के साथ समाज में भी जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. बद्रीश बड़ोनी ने अतिथियों, विशेषज्ञों, प्राध्यापकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इस दौरान महाविद्यालय की छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में समां बांधा। उत्कृष्ट प्रस्तुतियां देने वाली छात्राओं को पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर डॉ. डीएस भंडारी, डॉ. सरिता बहुगुणा, डॉ. मुकेश नैथानी, डॉ. रीना पुरोहित, डॉ. अर्चना कुनियाल, डॉ. सुनील रवान, डॉ. जयवीर सिंह, डॉ. कृष्ण चंद नेगी, सोना उनियाल, राकेश कुमार नौटियाल, पीपी नौटियाल सहित महाविद्यालय के प्राध्यापक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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*** संक्षिप्त परिचय / बायोडाटा *** नाम: गोविन्द सिंह पुण्डीर संपादक: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल टिहरी। उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार। पत्रकारिता अनुभव: सन 1978 से सतत सक्रिय पत्रकारिता। विशेषता: जनसमस्याओं, सामाजिक सरोकारों, संस्कृति एवं विकास संबंधी मुद्दों पर गहन लेखन और रिपोर्टिंग। योगदान: चार दशकों से अधिक समय से प्रिंट व सोशल मीडिया में निरंतर लेखन एवं संपादन वर्तमान कार्य: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान करना।
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