26 साल बाद भी सड़क को तरस रहे ग्रामीण, आज भी मरीजों व गर्भवती महिलाओं को डंडी-कंडी का सहारा
टिहरी गढ़वाल 6 सितम्बर। प्रतापनगर विधानसभा क्षेत्र के सीमांत गांव सिलोडा में आजादी के दशकों और उत्तराखंड राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी सड़क नहीं पहुंच पाई है। सड़क के अभाव में ग्रामीणों को दुर्गम रास्तों से पैदल चलकर मुख्य मार्ग तक पहुंचना पड़ता है। बीमार, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को कई किलोमीटर तक डंडी-कंडी के सहारे ले जाने की मजबूरी बनी हुई है।
पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य एवं प्रदेश कांग्रेस महासचिव राकेश राणा ने सरकार पर विकास के दावों को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा की ‘डबल इंजन’ सरकार द्वारा गांव तक सड़क पहुंचाने की कई घोषणाएं की गईं, लेकिन धरातल पर स्थिति नहीं बदली।
राणा ने कहा कि बारिश के दौरान फिसलन भरे रास्तों पर मरीजों को सड़क तक पहुंचाना बेहद जोखिम भरा हो जाता है। “अब सवाल सिर्फ सड़क का नहीं, इंसानी जिंदगी का है। सरकार बताए कि सिलोडा को सड़क कब मिलेगी?” उन्होंने गांव तक सड़क निर्माण कार्य तत्काल शुरू करने की मांग की।




