टिहरी गढ़वाल 18 सितम्बर। बौराड़ी शहीद स्मारक में चल रही शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन कथा व्यास डॉ. दुर्गेश आचार्य जी महाराज ने भगवान शिव की महिमा के साथ सत्य, भक्ति, मंत्र और सदाचार का महत्व बताया। उन्होंने श्रद्धालुओं को नवधा भक्ति का अर्थ समझाते हुए भगवान के नाम का स्मरण और कथा श्रवण करने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव जीव के कल्याण और उद्धार करने वाले देवाधिदेव हैं। कथा के दौरान वट और विल्व वृक्ष तथा कथा स्थल के पंडाल की परिक्रमा की धार्मिक महिमा का वर्णन किया। उन्होंने जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति के संदर्भ में धार्मिक आस्था और साधना के महत्व को बताया। प्रयागराज में स्नान की महिमा का भी वर्णन किया गया।
डॉ. आचार्य ने भगवान वशिष्ठ द्वारा मंत्रों की महिमा बताए जाने का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि श्रद्धा और विश्वास के साथ मंत्र जाप करने से मन को एकाग्र करने में सहायता मिलती है। उन्होंने ब्रह्मा जी और सावित्री से जुड़े प्रसंग का भी वर्णन किया। बताया कि सावित्री ने भगवान शिव से पापमुक्ति की प्रार्थना की, जिसके बाद शिवजी ने एक ऋषि को उसके पास भेजकर शिव नाम का जाप करने की सलाह दी।
कथा में विद्वान देवदत्त के पुत्र का प्रसंग सुनाते हुए बताया गया कि वह गंगा मैया के किनारे कुटिया बनाकर रहने लगा और उसने संकल्प लिया कि परिस्थितियां कैसी भी हों, वह कभी झूठ नहीं बोलेगा। इस प्रसंग के माध्यम से सत्य के महत्व को बताया गया।
डॉ. आचार्य ने डाकू रत्नाकर की कथा भी सुनाई। उन्होंने बताया कि संतों के मार्गदर्शन और राम नाम के जाप से रत्नाकर के जीवन में परिवर्तन आया और वह आगे चलकर महर्षि वाल्मीकि के रूप में प्रसिद्ध हुए। उन्होंने कहा कि भक्ति और नाम स्मरण से मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ सकता है।
इस अवसर पर समिति अध्यक्ष राकेश राणा, कोषाध्यक्ष महावीर प्रसाद उनियाल, गोविंद सिंह पुंडीर, टीकम सिंह चौहान, नीलकंठ डिमरी, आनंद घिल्डियाल, सतीश थपलियाल, नित्यानंद बहुगुणा, मनोज शाह, गंगा थपलियाल, रोशन थपलियाल, शैला देवी, कल्पना भट्ट, अंबिका नैथानी, सोनम भंडारी, अनीता थपलियाल, राम देई रावत और सपना कठैत सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे। मंडप आचार्य हेमंत नौटियाल, कृष्ण बालक मिश्रा, राम रमैया भट्ट, कुलदीप नौटियाल, अनिल नौटियाल और कपिल देव उनियाल आदि ने कथा आयोजन में सहभागिता की।




