टिहरी गढ़वाल। बौराड़ी शहीद स्मारक में आयोजित शिव महापुराण कथा के पांचवें खंड में कथा व्यास राष्ट्रीय संत डॉ. दुर्गेश आचार्य ने तारकासुर वध, गणेश जन्म और त्रिपुरासुर संहार के प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि शिव महापुराण केवल धार्मिक कथा नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली प्रेरणा है। कथा में बताए गए धर्म, भक्ति, संयम और सदाचार के संदेश को अपने आचरण में उतारना ही कथा की सार्थकता है।
कथा में बताया गया कि तारकासुर ने कठोर तप कर वरदान प्राप्त किया था कि उसका वध केवल भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही हो सकता है। सती के वियोग के बाद भगवान शिव वैराग्य में थे। देवताओं ने माता पार्वती की सहायता से भगवान शिव को गृहस्थ जीवन के लिए प्रेरित किया। शिव-पार्वती विवाह के बाद कार्तिकेय का जन्म हुआ। कार्तिकेय ने युद्ध-कला में दक्षता हासिल कर तारकासुर से युद्ध किया और उसका वध कर देवताओं को उसके अत्याचार से मुक्ति दिलाई।
इसके बाद गणेश जन्म का प्रसंग सुनाया गया। माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से गणेशजी की रचना कर उन्हें द्वार पर पहरा देने को कहा। भगवान शिव के पहुंचने पर गणेशजी ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। शिवगणों और गणेशजी के बीच युद्ध हुआ। भगवान शिव ने गणेशजी का सिर काट दिया। माता पार्वती के आग्रह पर भगवान शिव ने हाथी का सिर लगाकर गणेशजी को पुनर्जीवित किया और उन्हें गणों का अधिपति बनाया।
त्रिपुरासुर संहार का प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास ने इसके आध्यात्मिक पक्ष को भी समझाया। उन्होंने कहा कि त्रिपुर के तीन पुरों को मनुष्य के भीतर मौजूद काम, क्रोध और लोभ जैसे विकारों के प्रतीक के रूप में भी देखा जा सकता है। भगवान शिव का त्रिपुर संहार मनुष्य को इन विकारों पर विजय प्राप्त कर संयम और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
पर्यावरण संरक्षण का भी दिया संदेश
कथा व्यास ने श्रद्धालुओं से प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि देवभूमि है। यहां धार्मिक आस्था के साथ आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को हिमालय, जंगल, नदियों और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील है। ग्लेशियरों में बदलाव, तापमान में वृद्धि और प्राकृतिक जलस्रोतों में परिवर्तन जैसी परिस्थितियां चिंता का विषय हैं। केदारनाथ सहित धराली और थराली में सामने आई प्राकृतिक घटनाओं ने हिमालयी क्षेत्रों में सुरक्षित और संतुलित विकास की आवश्यकता को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन इसके साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
अतिथियों ने लिया व्यास पीठ का आशीर्वाद
कथा के दौरान पूर्व मंत्री दिनेश धनै, पूर्व ब्लाक प्रमुख भिलंगना विजय गुनसोला, पूर्व कनिष्ठ प्रमुख थौलधार कुलदीप पंवार तथा डायट से डॉ. वीर सिंह रावत ने व्यास पीठ पर पहुंचकर कथा व्यास से आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर आयोजन समिति के अध्यक्ष राकेश राणा, कोषाध्यक्ष महावीर प्रसाद उनियाल, टीकम सिंह चौहान, गोविंद सिंह पुंडीर, कुलदीप पंवार, लाखी सिंह पुरसोडा, मनोज शाह, सतीश थपलियाल, रोशन थपलियाल, श्रीमती ज्योत्सना रतूड़ी, अनीता थपलियाल,सपना कठैत, राम देई रावत, शैला बैलवाल, गुड्डी देवी, अंबिका मैठाणी, सहित समिति के पदाधिकारी एवं श्रद्धालु मौजूद रहे।




