संस्कृत केवल भाषा अथवा विषय नहीं बल्कि जीवन को जीने की संपूर्ण कला का नाम है: डॉ चंडी प्रसाद घिल्डियाल “दैवज्ञ”
देहरादून 7 अक्टूबर । संस्कृत केवल भाषा अथवा विषय नहीं है बल्कि वह तो संपूर्ण जीवन जीने की कला का नाम है, इसलिए संस्कृत के बिना पूर्ण मानव बनने की संकल्पना सिद्ध नहीं हो सकती है।
उपरोक्त विचार सहायक निदेशक शिक्षा एवं संस्कृत शिक्षा आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल “दैवज्ञ” ने व्यक्त किये वह आज कन्या गुरुकुल डिग्री कॉलेज राजपुर रोड देहरादून में जनपद स्तरीय संस्कृत छात्र प्रतियोगिताओं के उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता कर रहे थे, उन्होंने कहा कि जिस प्रकार बाजार से लाई हुई भिंडी सब्जी नहीं है वह केवल भिंडी है जब उसे घर में लाकर धोया जाएगा, फिर छौका लगाया जाएगा, पकाया जाएगा तब उसे सब्जी कहेंगे ठीक इसी प्रकार मानव का भी संस्कृत के द्वारा निर्माण होने के बाद ही वह मानव कहलाता है।
सहायक निदेशक ने कहा कि मानव को मानव बनाने में संस्कृत की महत्वपूर्ण भूमिका है इसलिए संस्कृत संस्थान द्वारा आयोजित इन प्रतियोगिताओं का उद्देश्य इन भावनाओं को जन-जन तक पहुंचाना है, कार्यक्रम के अति विशिष्ट अतिथि टपकेश्वर महादेव के महंत 108 स्वामी कृष्णानंद गिरी महाराज ने कहा कि उत्तराखंड राज्य में संस्कृत का द्वितीय राजभाषा होना अपने आप में गौरव का विषय है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री तीर्थ सिंह रावत के प्रतिनिधि के रूप में पूर्व राज्य मंत्री सुभाष जोशी ने कहा कि पतंजलि और पाणिनि की साधना से पुष्पित और पल्लवित संस्कृत को हम क्या दे सकते हैं हम तो सिर्फ उसको नमन कर सकते हैं।
उद्घाटन समारोह में पहुंचने पर मुख्य अतिथि ,अध्यक्ष और अति विशिष्ट अतिथि का जनपद संयोजक आचार्य मनोज शर्मा ने मुख्य शिक्षा अधिकारी के प्रतिनिधि के रूप में फूल माला, पुष्पगुच्छ, अंग वस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया छात्र-छात्राओं द्वारा मनमोहक प्रस्तुतियां दी गई कार्यक्रम का संचालन प्रवक्ता सुभाष डोभाल ने किया।
संयोजक मनोज शर्मा ने बताया कि 8 तारीख को प्रतियोगिताओं का समापन होगा प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली टीमें 23 और 24 अक्टूबर को हरिद्वार में आयोजित प्रांतीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करेंगी।




