कथा सुनने के बाद आचरण करना जरूरी : नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज

Garhninad Desk
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चंडीगढ़। श्री राधा कृष्ण मंदिर सैक्टर 40 ए में आयोजित हो रही त्रिदिवसीय शिव महापुराण कथा के तृतीय दिन भारी संख्या में श्रद्धालु कथा का श्रवण करने पहुंचे। इस अवसर पर कथा वाचक स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि श्री शिव महापुराण में मानव कल्याण के तीन साधन बताए गए है।

प्रथम श्रवण, दूसरा कीर्तन और तीसरा मनन, अर्थात पहले हम भगवान की कथा का श्रवण करें। उसके बाद में उसका कीर्तन व फिर कथा सुनने के बाद उसका चितन। कोई भी कथा केवल सुनने से लाभकारी नहीं हो जाती, बल्कि सुनने के बाद उसका हमें आचरण भी करना पड़ता है। श्री शिव महापुराण में यही बात बताई गई है। उन्होंने कहा कि श्री शिव महापुराण की कथा बताती है कि आधा अधूरा ज्ञान व्यक्ति को मोह पास में बांध देता है। आधा अधूरा ज्ञान माया में डाल देता है। परम ज्ञानी श्री नारद जी महाराज भी जीवन में एक बार अहंकार करने के कारण माया के वश में हो गए और उन्होंने भगवान से उनका स्वरूप मांगा। जिस पर भगवान ने उनको बंदर का मुख दे दिया। भगवान के द्वारा रची हुई माया में श्री नारद जी महाराज फंस गए और क्रोध करते हुए उन्होंने भगवान नारायण को ही शाप दे दिया। जिसके कारण भगवान को राम बन करके स्त्री वियोग सहना पड़ा। शिव कथा में वह प्रभाव है जो माया को मिटा सकती है, जो दंभ को मिटा सकती है, कपट को मिटा सकती है। उसके लिए हमें पूरे मन और सच्ची श्रद्धा से श्री शिव महापुराण की कथा का श्रवण करना चाहिए।

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