नई राजनीतिक चेतना के जागरण से 2026 रहेगा राजनीति के लिए चुनौतीपूर्ण वर्ष: आचार्य दैवज्ञ

Govind Pundir
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देहरादून। ज्योतिषीय दृष्टि से वर्ष 2026 भारतवर्ष की राजनीति के लिए उथल-पुथल, बड़े बदलावों और गंभीर चुनौतियों का संकेतक माना जा रहा है। यह वर्ष केवल राजनीतिक अस्थिरता ही नहीं, बल्कि देश में नई राजनीतिक चेतना के जागरण का भी साक्षी बनेगा।
उत्तराखंड ज्योतिष रत्न एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध ज्योतिष वैज्ञानिक आचार्य डॉ. चंडी प्रसाद दैवज्ञ के अनुसार, फरवरी 2026 के बाद मंगल और राहु का प्रभाव भारतीय राजनीति में एक अस्थिर लेकिन तीव्र परिवर्तनकारी योग का निर्माण करेगा। यह समय देश के लिए एक गहन परीक्षा काल जैसा रहेगा।
उन्होंने कहा कि इस अवधि में राजनीति में साधु-संतों के हस्तक्षेप को लेकर जनविरोध उभर सकता है, जिससे सामाजिक संतुलन प्रभावित होने की संभावना है।
सत्ता परिवर्तन और नए नेतृत्व के संकेत
आचार्य दैवज्ञ सौरमंडल के गहन विश्लेषण के आधार पर बताते हैं कि वर्ष 2026 में भारत के कई राज्यों में सत्ता परिवर्तन के संकेत हैं, वहीं केंद्रीय स्तर पर भी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम संभव हैं।
हालांकि, इस परिवर्तन का सकारात्मक पक्ष यह होगा कि देश को नया, सशक्त और वैचारिक रूप से जागरूक नेतृत्व प्राप्त हो सकता है।
उन्होंने कहा कि इस नवचेतना के निर्माण में पत्रकार, लेखक, कवि और शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जिससे लोकतांत्रिक विमर्श और अधिक मजबूत होगा।
शनि का गोचर: शासन और जवाबदेही की कसौटी
आचार्य दैवज्ञ के अनुसार, शनि का गोचर शासन व्यवस्था और राजनीतिक जवाबदेही को गहराई से प्रभावित करेगा। इससे नेताओं पर नैतिकता और पारदर्शिता बनाए रखने का दबाव बढ़ेगा।
अनुभवी, धैर्यवान और दूरदर्शी नेताओं के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद स्थायित्व प्रदान करने वाला हो सकता है।
सीमावर्ती तनाव और राष्ट्रीय सुरक्षा पर दबाव
ज्योतिषीय संकेत यह भी दर्शाते हैं कि वर्ष 2026 में सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव बढ़ सकता है। पाकिस्तान के साथ छोटे स्तर के सैन्य टकराव या आतंकवादी घटनाओं की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
ऐसी परिस्थितियों में भारत को कड़ा और निर्णायक रुख अपनाना पड़ सकता है।
प्राकृतिक आपदाएँ और पर्यावरणीय संकट
डॉ. दैवज्ञ ने चेताया कि 2026 में पर्यावरणीय असंतुलन बढ़ सकता है। जल से जुड़ी आपदाएँ, भूकंप एवं अन्य प्राकृतिक घटनाएँ राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिरता को भी प्रभावित कर सकती हैं।
इन परिस्थितियों से निपटने के लिए दूरदर्शी नीतियों की आवश्यकता होगी।
उत्तराखंड की राजनीति पर प्रभाव
अपने गृह राज्य उत्तराखंड की राजनीति पर बोलते हुए आचार्य दैवज्ञ ने कहा कि राज्य का उदय कर्क लग्न में हुआ है, इसलिए राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक अस्थिरता का प्रभाव यहां भी देखने को मिल सकता है।
उन्होंने संकेत दिए कि राज्य में महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव संभव हैं, जिनकी शुरुआत पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता से हो सकती है।
संत-महात्माओं को राजनीति से दूरी की सलाह
आचार्य दैवज्ञ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भगवाधारी साधु-संतों को राजनीति में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप से दूर रहना चाहिए। अन्यथा समाज में उनके प्रति विरोध की भावना बढ़ सकती है, जो सामाजिक ताने-बाने के लिए शुभ नहीं होगी।

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से वर्ष 2026 भारतीय राजनीति के लिए परिवर्तनकारी, संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण रहने वाला है।
इस दौर में धैर्य, विवेक, नैतिक निर्णय और जनसंवाद ही स्थिरता और प्रगति के प्रमुख आधार होंगे।


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*** संक्षिप्त परिचय / बायोडाटा *** नाम: गोविन्द सिंह पुण्डीर संपादक: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल टिहरी। उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार। पत्रकारिता अनुभव: सन 1978 से सतत सक्रिय पत्रकारिता। विशेषता: जनसमस्याओं, सामाजिक सरोकारों, संस्कृति एवं विकास संबंधी मुद्दों पर गहन लेखन और रिपोर्टिंग। योगदान: चार दशकों से अधिक समय से प्रिंट व सोशल मीडिया में निरंतर लेखन एवं संपादन वर्तमान कार्य: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान करना।
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