छात्रों की मानसिक सेहत पर प्रशासन गंभीर, हर संस्थान में बनेगी ‘Mental well-being टीम’

टिहरी गढ़वाल, 02 अप्रैल 2026। मा० सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली के निर्देशों के अनुपालन में जनपद में छात्र-छात्राओं की मानसिक सेहत को लेकर प्रशासन सक्रिय हो गया है। इसी क्रम में कलेक्ट्रेट सभागार में मुख्य विकास अधिकारी वरूणा अग्रवाल की अध्यक्षता में उच्च शिक्षण, शैक्षणिक एवं कोचिंग संस्थानों में Mental well-being नियंत्रण समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक में सीडीओ ने छात्रों की मानसिक स्थिति, बढ़ते तनाव और घटती उपस्थिति जैसे गंभीर मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने सभी संस्थानों को निर्देश दिए कि पढ़ाई के साथ-साथ सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाए, ताकि छात्रों का सर्वांगीण विकास हो सके।
उन्होंने कहा कि संस्थान यह समझने का प्रयास करें कि छात्रों को पढ़ाई, सोशल मीडिया, पारिवारिक समस्याओं या अन्य कारणों से किसी प्रकार का मानसिक दबाव तो नहीं है। ऐसे मामलों की समय रहते पहचान कर समाधान निकालना आवश्यक है।
हर संस्थान में होगी काउंसलिंग व्यवस्था
बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रत्येक शिक्षण एवं कोचिंग संस्थान से दो-दो व्यक्तियों को नामित किया जाएगा, जिन्हें विशेष मनोवैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। ये प्रशिक्षित सदस्य काउंसलिंग के माध्यम से छात्रों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करेंगे।
घटती उपस्थिति पर जताई चिंता
सीडीओ ने कहा कि हाल के दिनों में छात्रों की उपस्थिति में कमी चिंता का विषय है। काउंसलिंग और संवाद के माध्यम से ही छात्रों की वास्तविक समस्याओं को समझा जा सकता है। इसके लिए सभी संस्थानों को सामूहिक प्रयास करने होंगे।
बैठक में डीपीओ संजय गौरव, श्रम प्रवर्तन अधिकारी आइशा, प्रोफेसर ए.के. सिंह, डॉ. के.एस. जोहरी, छाया चतुर्वेदी, डॉ. बीना रानी, डॉ. बी.आर. भद्री, डॉ. मनोज कुमार, विजेंद्र लिंगवाल, मयंक, मुकेश प्रसाद सहित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्य एवं प्रोफेसर उपस्थित रहे।
प्रशासन का उद्देश्य स्पष्ट है—छात्रों को तनावमुक्त वातावरण देकर उनके उज्ज्वल भविष्य की दिशा तय करना।



