आज हमारी संस्कृति को नष्ट करने की कुत्सित कोशिश हो रही- स्वामी रसिक महाराज 

Govind Pundir
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  • सनातन धर्म विकास परिषद उत्तर प्रदेश के नवनियुक्त अध्यक्ष ( कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त) स्वामी रसिक महाराज झूंसी में आयोजित युवा सनातनी चिंतन शिविर में शामिल हुए।
  • युवा संतों से किया आह्वान- लोगों के बीच जाएं और हिंदू समाज को एक करें।
  • रसिक महाराज बोले – हिंदू समाज के मंदिरों को सरकार के अधिग्रहण से मुक्त किया जाए 

प्रयागराज। पूरी दुनिया में हिंदू संस्कृति की पहचान हमारे त्याग और कर्तव्यों के निर्वहन से है। समाज में समरस भाव, पूरे विश्व के सुख की कामना करने के कारण है। आज हमारी संस्कृति को नष्ट करने की कुत्सित कोशिश हो रही है। यह चिंता सनातन धर्म विकास परिषद उत्तर प्रदेश के नवनियुक्त अध्यक्ष स्वामी रसिक महाराज ने जाहिर की।

रसिक महाराज झूंसी में आयोजित सनातन युवा संत चिंतन शिविर को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, एक ओर हम सब अपनी श्रेष्ठ संस्कृति की पहचान बना रहे हैं तो दूसरी ओर राष्ट्र विरोधी ताकतें हमें तोड़ने में जुटी हैं। ऐसी शक्तियों को पहचान कर अपने अस्तित्व के लिए धार्मिक दायित्व को निर्वहन की जिम्मेदारी लेनी है।

युवा संतों से मार्गदर्शन करने का किया आग्रह

उन्होंने कहा कि युवा संतों को ही आगे समाज का मार्गदर्शन करना है। हम लोगों के बीच जाएं और हिंदू समाज को एक करें। इसके लिए संगठन की ओर से कई कार्यक्रम तय किए गए हैं। संत अपने समय से 15 दिन निकाल कर मतांतरण, गो हत्या, नागरिक कर्तव्यों के पालन, पर्यावरण एवं सामाजिक समरसता के साथ संयुक्त परिवार एवं संस्कारों की चर्चा समाज में करें। सनातन धर्म परिषद के सहयोग से संगोष्ठियों व प्रवचन आदि के कार्यक्रम भी कराए जाएंगे।

ब्रह्मचारी आनंद स्वरूप महाराज बोले- मतांतरण, गोहत्या पर प्रतिबंध लगे

अखिल भारतीय सनातन संस्कृति समिति के अन्तर्राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रह्मचारी आनंद स्वरूप ने कहा, अब इस पवित्र धरती पर मतांतरण, गो हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगना चाहिए। हिंदू समाज के मंदिरों को सरकार के अधिग्रहण से मुक्त किया जाए। वर्तमान में राष्ट्रीय स्तर पर इन कार्यक्रमों के माध्यम से भी संत समाज लोगों को संदेश दें। राष्ट्र विरोधी शक्तियों, धर्म विरोधी शक्तियों, संस्कृति विरोधी शक्तियों को संत आदिकाल से जवाब देते आए हैं। इसे फिर प्रभावी तरीके से करना होगा।

संत समाज के लोगों का किया आह्वान

मंचासीन सभी वक्ताओं ने आवाहन किया कि संत समाज के लोग ऐसे लोगों की घर वापसी सहयोगी बनें जो किन्हीं कारणों से हमसे दूर हो गए। इसके लिए व्यापक अभियान चलाने की आवश्यकता है। यह समय हिंदू जीवन मूल्यों की पुनर्स्थापना का है। अभावग्रस्त क्षेत्रों में कथा के कार्यक्रम, वेद और संस्कृति का प्रचार प्रसार संतों की जिम्मेदारी है। राष्ट्रीय बिंदुओं, स्वाभिमान के विषय पर भी संतों को मार्गदर्शन करना है। निकट भविष्य में राष्ट्रभक्तों को अपने गौरवशाली इतिहास का बोध कराने का भी अभियान चलाया जाएगा। संत चिंतन शिविर से संकल्प लेकर निकलें कि वे जनजागरण का हिस्सा बनेंगे।

द्विदिवसीय  चिंतन शिविर में 10 सामाजिक, समरसता एवं धार्मिक समागम एकता प्रस्ताव पारित किए गए। शिविर में प्रमुख रूप से स्वामी विज्ञानानंद जी जम्मू-कश्मीर , डा अद्वैतानंद सरस्वती राजस्थान , स्वामी प्रज्ञानंद महाराष्ट्र, स्वामी अवधेशानंद सरस्वती गुजरात, डॉ प्रणव भारतीय हैदराबाद, स्वामी शिवानंद सरस्वती उत्तराखंड, डॉ विशुद्धानंद पंजाब, लेखक अतुल विस्मरणीय केरल एवं 2 हजार से ज्यादा संत-महात्मा, लेखक, चिंतक मौजूद रहे।

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*** संक्षिप्त परिचय / बायोडाटा *** नाम: गोविन्द सिंह पुण्डीर संपादक: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल टिहरी। उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार। पत्रकारिता अनुभव: सन 1978 से सतत सक्रिय पत्रकारिता। विशेषता: जनसमस्याओं, सामाजिक सरोकारों, संस्कृति एवं विकास संबंधी मुद्दों पर गहन लेखन और रिपोर्टिंग। योगदान: चार दशकों से अधिक समय से प्रिंट व सोशल मीडिया में निरंतर लेखन एवं संपादन वर्तमान कार्य: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान करना।
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