चमोली के सेमी ग्वाड़ में अलकनंदा तट पर 19 अक्टूबर तक हो रहा कथा का आयोजन, प्रतिदिन दोपहर दो बजे से हो रहा सीधा प्रसारण
चमोली। राष्ट्रीय संत डॉ. दुर्गेश आचार्य महाराज ने कहा कि श्रीमद् देवी भागवत महापुराण की कथा मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाने के साथ ही धर्म, सदाचार, कर्तव्य और आत्मकल्याण का मार्ग दिखाती है। कथा के प्रसंगों में जीवन के गूढ़ रहस्य समाहित हैं, जिनसे मनुष्य को अपने कर्मों का बोध होता है और सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।
चमोली जनपद के ग्राम सेमी ग्वाड़ में अलकनंदा नदी के तट पर 11 से 19 अक्टूबर तक श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। परम पूज्य सद्गुरु ब्रह्मऋषि एवं राष्ट्रीय संत डॉ. दुर्गेश आचार्य महाराज के मुखारविंद से श्रद्धालु कथा का श्रवण कर रहे हैं। कथा का यूट्यूब पर प्रतिदिन दोपहर दो बजे से सीधा प्रसारण भी किया जा रहा है।
कथा के प्रसंग में महाराज जनमेजय के सर्प यज्ञ और उसके परिणामों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि अपने कर्मों के दुष्परिणामों से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने सद्गुरु की शरण ली। भगवान वेदव्यास ने उन्हें देवी भागवत कथा सुनाई। यह प्रसंग मनुष्य को अपने कर्मों पर विचार करने और आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से जीवन को सही दिशा देने की प्रेरणा देता है।
कथा में मंत्र विज्ञान, औषधि विज्ञान और जीवन के आध्यात्मिक पक्ष से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से सनातन परंपरा के ज्ञान को भी रेखांकित किया जा रहा है। श्रद्धालुओं से कथा श्रवण कर धर्म, संस्कृति और सदाचार के संदेश को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया गया है।
कथा का आयोजन श्रीमती विश्वंभरी देवी, धर्मपत्नी स्वर्गीय लीलानंद सेमवाल तथा विश्वंभर दत्त सेमवाल और उनके परिवार की ओर से किया जा रहा है। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से अधिकाधिक संख्या में कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है।




