टिहरी गढ़वाल 27 अगस्त। मेडिकल कॉलेज निर्माण को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय ने गुरुवार को अपने आवास पर पत्रकार वार्ता कर कहा कि ईणिया में ही मेडिकल कॉलेज बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस संबंध में स्पष्ट आश्वासन दिया है। इसके लिए वह उनका आभार व्यक्त करते हैं। उपाध्याय ने उम्मीद जताई कि आगामी अक्टूबर तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर कमलों से मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास कराया जा सकता है।
किशोर उपाध्याय ने बताया कि प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज में 100 एमबीबीएस सीटों के साथ 400 बेड का अस्पताल विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नियमानुसार पहले अस्पताल को करीब दो वर्ष संचालित करना होगा, जिसके बाद एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास है कि टिहरी को आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय मेडिकल डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाए।
मेडिकल कॉलेज निर्माण संयुक्त संघर्ष समिति के आंदोलन की सराहना करते हुए विधायक ने कहा कि समिति का आंदोलन बेहद शांतिपूर्ण और शालीन तरीके से चल रहा है। उन्होंने संघर्ष कर रहे लोगों को साधुवाद देते हुए कहा कि उन्होंने अपनी मांग को बिना किसी के खिलाफ नारेबाजी या विरोध के सामने रखा है। उन्होंने संघर्ष समिति के सदस्यों का आभार भी जताया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने 24 अगस्त को मेडिकल कॉलेज निर्माण संयुक्त संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मंडल के साथ हुई बातचीत में स्पष्ट रूप से कहा था कि मेडिकल कॉलेज ईणिया में ही बनाया जाएगा। उपाध्याय के अनुसार मुख्यमंत्री जी के सामने संघर्ष समिति के लोगों ने विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद यदि कोई असंतुष्ट है तो उसका कारण वह नहीं बता सकते, लेकिन समिति से आग्रह है कि वह अपने जनसरोकारों के लिए इसी तरह शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखती रहे।
हिमालय और आपदा के मुद्दे पर भी चिंता
पत्रकार वार्ता में उपाध्याय ने नेपाल में आई बाढ़ और हिमालयी क्षेत्र की बदलती परिस्थितियों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत, चीन और नेपाल समेत पूरे हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरणीय और आपदा संबंधी चुनौतियों को गंभीरता से लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते नेपाल को संभावित जलप्रवाह की चेतावनी मिल जाती तो नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सकता था।
उन्होंने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा सहित विभिन्न कारणों से भारतीय नागरिक भी हिमालयी क्षेत्रों में आवागमन करते हैं, इसलिए हिमालय की सुरक्षा सीधे तौर पर भारत के लोगों से जुड़ा विषय है। उपाध्याय ने कहा कि वह लंबे समय से सस्टेनेबल हिमालयन डेवलपमेंट की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं।
उन्होंने चेताया कि यदि हिमालय और जलस्रोतों के संरक्षण को लेकर समय रहते गंभीर कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों के सामने पानी और पर्यावरण का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण को लेकर व्यापक जनजागरूकता की आवश्यकता बताई और हिमालय संरक्षण के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की बात कही।
टिहरी को आपस में बांटने की कोशिश न हो
किशोर उपाध्याय ने कहा कि टिहरी के विकास के मुद्दों को लेकर जिले के लोगों को आपस में बांटना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी जन प्रतिनिधियों को टिहरी के विकास के लिए दलगत राजनीति से ऊपर उठकर साथ आना चाहिए। उन्होंने कहा कि अतीत में कई महत्वपूर्ण संस्थान और योजनाएं टिहरी से बाहर चली गईं, लेकिन उस समय अपेक्षित जनजागरूकता नहीं दिखाई गई। उन्होंने कहा कि अब आवश्यकता टिहरी के लोगों को आपस में जोड़कर विकास के लिए सामूहिक प्रयास करने की है।
उन्होंने कहा कि टिहरी रियासत के भारत में विलय के आंदोलन से लेकर श्रीदेव सुमन, नागेंद्र सकलानी और अन्य आंदोलनों की लंबी परंपरा रही है। बांध विस्थापन और उत्तराखंड राज्य आंदोलन तक जनता ने अपने अधिकारों के लिए संघर्ष किया है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज की मांग भी जनहित से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है, जिसे शांतिपूर्ण और सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
पत्रकार वार्ता में मीडिया प्रभारी राजेन्द्र डोभाल, जी मण्डल अध्यक्ष संदीप, मुनेन्द्र भट्ट शामिल रहे।




