स्वास्थ्यकर्मियों के बिना स्वास्थ्य और विकास लक्ष्य हासिल नहीं कर सकते: डॉ0 हर्षवर्धन

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अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस का आयोजन, वीडियो कॉन्फ्रेंस से मंत्री डॉ. हर्षवर्धन का सम्बोधन

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने ‘नर्स और मिडवाइफ का वर्ष’ घोषित

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने आज अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस सामारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संबोधित किया। इस साल अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस का महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि इस वर्ष को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने ‘नर्स और मिडवाइफ का वर्ष’ घोषित किया है। इस अवसर लाखों नर्सों को आयोजन से ऑनलाइन जोड़ा गया था।

“नर्सों और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों के बिना हम महामारी के खिलाफ लड़ाई नहीं जीत सकते” डॉ. हर्षवर्धन

नर्सिंग पेशे से जुडे लोगों के काम और निस्वार्थ समर्पण की भावना की सराहना करते हुए उन्हें स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के मजबूत स्तंभ बताया और कहा “आपके काम और ईमानदारी की थाह नहीं ली जा सकती। आपकी प्रतिबद्धता को शब्दों में परिभाषित नहीं किया जा सकता है। दयाभाव, समर्पण और हीलिंग टच देने के लिए आपका आभार। आप के लिए दिन चाहे कितना भी व्यस्तता भरा क्यों न हो मरीजों की देखभाल हमेशा आपकी प्राथमिकता होती है।

स्वास्थ्य मंत्री ने मौजूदा महामारी के दौर में निरंतर काम में जुटे रहने के लिए भी नर्सों का आभार व्यक्त किय और कहा कि नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के बिना “हम इस महामारी के खिलाफ लड़ाई नहीं जीत सकते और न ही सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने और सतत विकास लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं।”

हिंसा से स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा हेतु सरकार प्रतिबद्ध

डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि सरकार के उच्चतम स्तरों पर प्रतिबद्धता, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कोविड-19 के खिलाफ सरकार के अभियान का नेतृत्व कर रही है। उन्होंने कहा कि अग्रिम मोर्चे पर खडे स्वास्थ्यकर्मियों को किसी भी तरह की हिंसा से सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक अध्यादेश का प्रावधान किया गया है। अध्यादेश के तहत ऐसे हिंसक कृत्यों को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में रखने तथा हिंसा से प्रभावित स्वास्थ्यकर्मियों को मुआवजे का प्रावधान भी किया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसी हिसंक घटनाओं में लिप्त पाए गए लोगों को तीन से पांच साल तक की कैद की सजा और साथ में 50,000 रुपए से लेकर 2,00,000 तक के जुर्माने की सजा का प्रावधान किया गया है। गंभीर चोट पहुंचाने वालों को छह महीने से लेकर सात साल के कारावास की सजा तथा 1,00,000 रुपए से लेकर 5,00,000 रूपए तक के जुर्माने की सजा की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, अपराधी को पीड़ित को मुआवजे का भुगतान करने और संपत्ति के नुकसान के लिए उचित बाजार मूल्य का दोगुना अदा करने के लिए भी उत्तरदायी ठहराया गया है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इसके अतिरिक्त, सरकार ने कोविड के मरीजों के इलाज में लगे स्वास्थ्यकर्मियों के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज बीमा योजना को भी मंजूरी दी है इसके तहत 22.12 लाख स्वास्थ्य कर्मियों के लिए 90 दिनों का 50 लाख रुपए का बीमा कवर प्रदान करने की व्यवस्था की है। यह ऐसे स्वास्थ्य कर्मियों के लिए है जिन्हें कोविड रोगियों के सीधे संपर्क में होने का जोखिम रहने के कारण उनसे प्रभावित होने का खतरा होता है।

डॉ. हर्षवर्धन ने यह भी कहा कि मौजूदा परिदृश्य में, नर्सों को खुद ही कोविड-19 संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण के बारे में पर्याप्त सावधानी बरतनी है और सभी नियमों का पालन करना है ताकि न केवल वे इस बीमारी से खुद की रक्षा कर सकें बल्कि दूसरों को भी बचने की सही सलाह दे सकें। उन्होंने नर्सों को दिल्ली के आयुर्विज्ञान संस्थान और भारतीय नर्सिंग परिषद् द्वारा आयोजित किए जाने वाले विभिन्न वेबिनार का पूरा लाभ उठाने की सलाह दी।

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