“मातृभूमि के प्रति”

Govind Pundir
1 Min Read
खबर को सुनें

डॉ0 सुरेन्द्र दत्त सेमल्टी

अध्यक्ष- हिंदी सेवा समिति टि0ग0

                  कविता

कहाँ गया वह सारा वैभव,खेतों की सुंदर हरियाली,

हो चुकी आंखों से ओझल, टिहरी की सारी खुशहाली।

भिलंगना-भागीरथी के मध्य, टापू सा था यह एक शहर, 

जिधर भी जाती थी दृष्टि, उठती थी देख खुशी की लहर। 

शिक्षा-स्वास्थ्य का केंद्र बिंदु , प्राकृतिक सौंदर्य का खजाना, 

कचोट रहा हम सबके दिल को, हर पल जल में छुप जाना।

तीन धारा प्राकृतिक जलस्रोत, घंटाघर संगम राज दरबार,

रानीबाग भादू की मगरी, छीन लिये सबके घरबार। 

हिंदू मुस्लिम सिख सभी के, मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे, 

अथाह जलराशि के भीतर, कैद हो चुके हैं सारे। 

चनाखेत जेल सेमलतप्पड़, और अठूर के समतल खेत, 

रहती थी जहां रोनक हर पल, वहां अब मात्र जल बालू रेत। 

खुद का जीवन अंधकार बनाकर, यह शहर बना एक ऐसा दीप, 

जो फैलायेगा विद्युत प्रकाश देश में, वक्षस्थल पर चलेंगी हर पल शीप।

Share This Article
Follow:
*** संक्षिप्त परिचय / बायोडाटा *** नाम: गोविन्द सिंह पुण्डीर संपादक: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल टिहरी। उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार। पत्रकारिता अनुभव: सन 1978 से सतत सक्रिय पत्रकारिता। विशेषता: जनसमस्याओं, सामाजिक सरोकारों, संस्कृति एवं विकास संबंधी मुद्दों पर गहन लेखन और रिपोर्टिंग। योगदान: चार दशकों से अधिक समय से प्रिंट व सोशल मीडिया में निरंतर लेखन एवं संपादन वर्तमान कार्य: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान करना।
error: Content is protected !!