संतों को भी कानून-व्यवस्था का ध्यान रखना चाहिए : स्वामी रसिक महाराज

प्रयागराज/देहरादून। सनातन धर्म विकास परिषद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष एवं बद्रीनाथ धाम, उत्तराखंड के प्रमुख संत नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के अवसर पर हुई एक घटना को लेकर संतुलित प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि धर्म में परंपरा और शास्त्रों का पालन सर्वोपरि है तथा संतों सहित सभी को कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का सम्मान करना चाहिए।
स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि शास्त्रों के विरुद्ध किया गया कोई भी कार्य अंततः अशांति का कारण बनता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वे स्वयं और उनके अनुयायी शास्त्रानुसार पैदल चलकर ही स्नान करते हैं। उनके अनुसार यदि भारी भीड़ के सम्मान और कल्पवासियों की भावना का ध्यान रखते हुए कुछ दूरी पैदल चलकर स्नान कर लिया जाता, तो इससे किसी प्रकार की असुविधा नहीं होती।
उन्होंने यह भी कहा कि भीड़ प्रबंधन प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है और ऐसे आयोजनों में सभी पक्षों को प्रशासन का सहयोग करना चाहिए। स्वामी रसिक महाराज ने स्पष्ट किया कि माघ मेले में हुई घटना का वास्तविक सत्य सभी के सामने नहीं है, लेकिन ऐसी परिस्थितियों से धर्मगुरुओं को लेकर अनावश्यक विवाद उत्पन्न होता है, जो समाज के लिए उचित नहीं है।
स्वामी रसिक महाराज ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की घटनाओं से अन्य समुदायों को टिप्पणी का अवसर मिलता है, जो हिंदू समाज के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की परंपरा, मर्यादा और शंकराचार्य परंपरा के मूल उद्देश्यों—धर्म का प्रचार, संरक्षण और समाज को दिशा देने—से भटकाव पर आत्ममंथन की आवश्यकता है।
उन्होंने अपील की कि धर्मगुरु संयम, परंपरा और कानून-व्यवस्था का पालन करते हुए समाज में सौहार्द और गरिमा बनाए रखें, ताकि माघ मेले जैसे महापर्व की पवित्रता और भव्यता बनी रहे।



