भागवत ही कृष्ण अवतार का लक्ष्य : डॉ. दुर्गेश आचार्य महाराज

Govind Pundir
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टिहरी गढ़वाल 2 मार्च । चम्बा के हड़म डंडासली में स्वर्गीय श्रीमती कमला देवी, श्री मंगला नन्द कोठारी एवं श्री रतनमणि कोठारी की पुण्य स्मृति में कोठारी परिवार द्वारा भागवत कथा का आयोजन 27 फरवरी से किया जा रहा है।

भागवत कथा के चौथे दिन के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पूज्य डॉ. दुर्गेश आचार्य महाराज ने कहा कि भागवत का मूल उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण के प्रेमावतार को समाज में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि जीव का वास्तविक धर्म परमात्मा को प्राप्त करना है और चौरासी लाख योनियों के बाद मनुष्य जीवन बड़ी कठिनाई से प्राप्त होता है, इसलिए इसे भक्ति, सत्संग और सदाचार में लगाना चाहिए।
महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में समाज आसुरी प्रवृत्तियों, तामसी वृत्तियों और भेदभाव रूपी विष से ग्रसित है। ऐसे में भागवत कथा मन, वचन और कर्म को शुद्ध करने का माध्यम बनती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि वृत्रासुर ने भी हरिनाम के प्रभाव से प्रभु को प्राप्त किया। इसी प्रकार यदि समाज सात्विक आहार-विचार और प्रभु नाम का स्मरण करे तो अनेक विकृतियों से मुक्ति संभव है।
उन्होंने माता-पिता से आह्वान किया कि वे अपने बच्चों को संस्कारित करें तथा उनके जीवन में प्रभु नाम और नैतिक मूल्यों का समावेश करें। बालकों के नाम भी ईश्वर के नाम पर रखने की परंपरा भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिक शक्ति को दर्शाती है।
महाराज ने कहा कि जैसे प्रह्लाद ने भक्ति के बल पर अहंकार रूपी हिरण्यकशिपु का अंत कराया, उसी प्रकार आज समाज में फैले देहाभिमान, अहंकार और द्वेष को भक्ति से ही समाप्त किया जा सकता है। जब लोग समाज के भेदभाव रूपी विष को त्यागकर प्रेम, सद्भाव और समरसता को अपनाएंगे, तभी अमृतमयी रामराज्य की कल्पना साकार होगी।
उन्होंने कहा कि भागवत कथा का अंतिम लक्ष्य समाज में प्रेम, करुणा और मर्यादा की स्थापना करना है, जिससे श्रीकृष्ण का प्रेमावतार और भगवान राम की मर्यादा का आदर्श जन-जन तक पहुंचे। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्ति रस में सराबोर हुए।

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*** संक्षिप्त परिचय / बायोडाटा *** नाम: गोविन्द सिंह पुण्डीर संपादक: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल टिहरी। उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार। पत्रकारिता अनुभव: सन 1978 से सतत सक्रिय पत्रकारिता। विशेषता: जनसमस्याओं, सामाजिक सरोकारों, संस्कृति एवं विकास संबंधी मुद्दों पर गहन लेखन और रिपोर्टिंग। योगदान: चार दशकों से अधिक समय से प्रिंट व सोशल मीडिया में निरंतर लेखन एवं संपादन वर्तमान कार्य: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान करना।
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