पौड़ी, 03 अप्रैल 2026 । पौड़ी मुख्यालय का जिला पुस्तकालय अब पूरी तरह बदलकर एक आधुनिक, सुव्यवस्थित और आकर्षक अध्ययन केंद्र के रूप में उभरकर सामने आया है। पहले जहां यह पुस्तकालय मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा था, वहीं अब इसे पारंपरिक पहाड़ी शैली और आधुनिक सुविधाओं के समन्वय के साथ नया स्वरूप दिया गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा के विजन को आगे बढ़ाते हुए जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया के प्रयासों से पुस्तकालय का व्यापक कायाकल्प किया गया। निरीक्षण के दौरान सामने आई समस्याओं—जैसे जर्जर भवन, पेयजल की कमी और अध्ययन के अनुकूल माहौल का अभाव—को गंभीरता से लेते हुए निर्माण खंड लोनिवि को कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए, जिसके बाद तेजी से सुधार कार्य शुरू हुए।
जिला योजना के तहत पुस्तकालय के दोनों तल का नवीनीकरण किया गया है। यहां आधुनिक फर्नीचर, उन्नत शौचालय, सुव्यवस्थित पठन-पाठन व्यवस्था, बुक स्टोरेज, वाई-फाई जोन और स्वच्छ पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। साथ ही, पुस्तकालय तक आसान पहुंच के लिए मार्ग, पाथवे और रेलिंग का निर्माण भी किया गया है।
पुस्तकालय की सबसे खास पहचान इसकी छत पर बनाया गया घंटाघर है, जो पारंपरिक पहाड़ी वास्तुकला के अनुरूप तैयार किया गया है। यह घंटाघर प्रतिदिन सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक समय का संकेत देता है और परिसर में अनुशासन व प्रेरणा का माहौल बनाता है।
वर्तमान में यह पुस्तकालय छात्रों को शांत, स्वच्छ और सुविधायुक्त वातावरण प्रदान कर रहा है, जहां वे पारंपरिक पुस्तकों के साथ-साथ डिजिटल माध्यमों से भी अध्ययन कर सकते हैं। हाल ही में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने इसका लोकार्पण करते हुए इसे एक सराहनीय पहल बताया।
जिलाधिकारी ने कहा कि पुस्तकालय का उद्देश्य छात्रों और युवाओं में पढ़ने की आदत विकसित करना और उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर संसाधन उपलब्ध कराना है। प्रशासन की प्राथमिकता है कि जनपद के विद्यार्थियों को उच्च स्तर की अध्ययन सुविधाएं मिलें, और यह पुस्तकालय उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पौड़ी में जिला पुस्तकालय बना आधुनिक स्टडी हब, पहाड़ी शैली में नया रूप

*** संक्षिप्त परिचय / बायोडाटा *** नाम: गोविन्द सिंह पुण्डीर संपादक: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल टिहरी। उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार। पत्रकारिता अनुभव: सन 1978 से सतत सक्रिय पत्रकारिता। विशेषता: जनसमस्याओं, सामाजिक सरोकारों, संस्कृति एवं विकास संबंधी मुद्दों पर गहन लेखन और रिपोर्टिंग। योगदान: चार दशकों से अधिक समय से प्रिंट व सोशल मीडिया में निरंतर लेखन एवं संपादन
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