देहरादून 1 जून । उत्तराखंड के दिवंगत नेता पूर्व मुख्यमंत्री एवं केन्द्रीय मंत्री रहे मेजर जनरल रिटायर्ड स्व भुवन चंद्र खंडूरी की तेरहवीं पर स्व हरबंश कपूर मैमोरियल कम्यूनिटी हॉल गढ़ी कैंट डाकरा रोड देहरादून में भव्य एवं दिव्य श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया जिसमें देश-विदेश से संत महात्माओं, राजनैतिक हस्तियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं बड़ी संख्या में भारतीय जनता पार्टी के समर्पित कार्यकताओं ने पुष्प चढ़ाकर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की
इस अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए योगगुरु बाबा रामदेव, जयराम आश्रम के श्री ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, सोनीपत से कांग्रेस सांसद सतपाल ब्रह्मचारी,परमार्थ निकेतन से चिदानंद मुनि, आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि, महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद गिरी, अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनसा देवी हरिद्वार के श्री महन्त रविन्द्र पुरी , जगदगुरू राजराजेश्वरम महाराज ने संयुक्त रूप से स्व भुवन चंद्र खंडूरी के नाम पर जौलीग्रांट एयरपोर्ट का नामकरण करने की मांग सरकार से की। सनातन धर्म विकास परिषद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने स्व भुवन चंद्र खंडूरी का आध्यात्मिक पक्ष रखते हुए कहा कि वे केवल एक सैनिक, इंजीनियर और राजनेता ही नहीं थे, बल्कि भारतीय सनातन संस्कृति, गुरु परंपरा और धार्मिक मूल्यों में गहरी आस्था रखने वाले व्यक्तित्व भी थे। उनका जीवन अनुशासन, सादगी, राष्ट्रसेवा और अध्यात्म का सुंदर संगम माना जाता है।
सेना में उच्च पद पर रहते हुए भी उन्होंने हमेशा भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों को महत्व दिया। वे मानते थे कि किसी भी व्यक्ति की वास्तविक शक्ति केवल पद या अधिकार से नहीं, बल्कि उसके चरित्र, संस्कार और आध्यात्मिक सोच से बनती है। यही कारण था कि सार्वजनिक जीवन में भी उनकी छवि एक ईमानदार, सरल और मर्यादित नेता की रही।
उनका संत-महात्माओं के प्रति विशेष सम्मान था। वे समय-समय पर धार्मिक आयोजनों, सत्संगों और गुरु वंदना कार्यक्रमों में सम्मिलित होते रहे। उनका झुकाव विशेष रूप से वैष्णव परंपरा तथा भारतीय गुरु-शिष्य संस्कृति की ओर माना जाता था। वे संतों के मार्गदर्शन को समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक मानते थे।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि उन्होंने भारतीय सेना में लंबे समय तक सेवा देने के बाद भी उनके स्वभाव में विनम्रता बनी रही। उन्होंने हमेशा यह संदेश दिया कि शक्ति और पद के साथ विनम्रता और धर्म का संतुलन होना चाहिए। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहते हुए भी उन्होंने कई धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों को प्रोत्साहन दिया और देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक पहचान को सम्मान दिया।
पूर्व राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री रहे भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि उनके जीवन में राष्ट्रभक्ति और अध्यात्म एक-दूसरे के पूरक दिखाई देते हैं। वे मानते थे कि देश सेवा भी एक प्रकार की ईश्वर सेवा है। इसी सोच के कारण वे युवाओं को अनुशासन, संस्कार, सेवा और भारतीय परंपराओं से जुड़े रहने की प्रेरणा देते थे।
पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि स्वर्गीय जनरल खंडूरी जी का व्यक्तित्व आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि आधुनिक जीवन और उच्च पद प्राप्त करने के बाद भी व्यक्ति अपनी संस्कृति, आध्यात्मिकता और मानवीय मूल्यों से जुड़ा रह सकता है। आज इस अवसर पर जम्बू कश्मीर के राज्यपाल श्री सतीश महाना जी, उच्च शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत, प्रोफेसर रीता बहुगुणा जोशी, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी, विधायक गण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में स्व खंडूरी की धर्मपत्नी श्रीमती अरुणा खंडूरी, सुपुत्री विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खंडूरी भूषण, सुपुत्र श्री मनीष खंडूरी ने आए हुए सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।




