बुधू: हैप्पी दिवाला ओह- नो दिवाली

दिवाली का शुभ अवसर है तो शुभकामनाएं तो बनती हैं। बुधू की ओर से सभी को शुभकामनाएं। दिल से है। वैसे तो प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री भी देश प्रदेश को ढ़ेर सारी शुभकामनाएं दे ही रहे हैं, लगातार बढ़ती महंगाई के साथ।
कल धनतेरस थी। पहले सुबह जल्दी उठकर बुधिया को शुभकामना देने का मन रात बना चुका था। इससे पहले कि बुधिया को हैप्पी धनतेरस बोलता, बुधिया ने खाने के तेल की खाली बोतल सिर पर दे मारी। दो हफ्ते से खाली पड़ी है खाक धनतेरस।
कुछ लोगों को त्योहार भी जुआ खेलने का बहाना बन जाता है। बुधू को जुआ खेलना कतई पसंद नहीं है। हां पांच साल में एक दो बार। पूरे देश के साथ जुआ खेलता हूँ। लोकतंत्र और देश-प्रदेश की सेहत के लिए जरूरी है। 2019 का जुआ कंधों पर बढ़ता बोझ है। लोग पेट्रोल, डीजल के महंगे होने का रोना रोते हैं। बुधू फिकर नाट! इसका मतलब यह नहीं है कि बुधू अंधभक्त है।
दो पैर सलामत तो डीजल, पेट्रोल की समस्या क्यों पालें? बड़ी खबरों की खोज अपने अदृश्य वायुयान से। यह सिर्फ आश्वासन से उड़ता है। उम्मीद है दो-तीन साल में पूरा देश अपना लेगा। फिलहाल, दीवाली के पकोड़े तलिये, “थूक में ही सही। हैप्पी दिवाली। जय श्री राम। शुभकामनाएं।
आपका बुधू।