श्रीकोट गांव की एकता बनी मिसाल, संकट में जाति नहीं इंसानियत आई आगे

टिहरी गढ़वाल। जनपद टिहरी गढ़वाल के विकासखंड अंतर्गत ग्राम श्रीकोट (पोस्ट ऑफिस रौड़धार) में सामाजिक सौहार्द और आपसी सहयोग की एक अनुकरणीय मिसाल सामने आई है। यहां संकट की घड़ी में पूरे गांव ने एकजुट होकर यह साबित कर दिया कि मानवता किसी जाति या वर्ग से बड़ी होती है।
बीते सप्ताह श्रीकोट गांव निवासी मुकेश बागड़ी पर जंगल में भालू ने हमला कर दिया, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए। हमले में उनके चेहरे को अत्यधिक नुकसान पहुंचा। परिजनों द्वारा उन्हें तत्काल श्रीनगर ले जाया गया, जहां से चिकित्सकों ने उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें एम्स ऋषिकेश रेफर कर दिया। वर्तमान में मुकेश बागड़ी की हालत गंभीर बनी हुई है और उनका उपचार लगातार जारी है।
मुकेश बागड़ी की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण इलाज का खर्च उठाना परिवार के लिए चुनौतीपूर्ण था। ऐसे कठिन समय में गांव के बागड़ी समाज और रतूड़ी समाज सहित अन्य ग्रामीणों ने मानवता और भाईचारे का परिचय देते हुए सामूहिक सहयोग का संकल्प लिया। गांव के व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से लोगों ने अपनी-अपनी सामर्थ्य के अनुसार उनके बैंक खाते में आर्थिक सहायता भेजनी शुरू की।
गौरतलब है कि गांव के वे लोग जो वर्तमान में विदेशों में निवास कर रहे हैं, उन्होंने भी आगे बढ़कर आर्थिक सहयोग प्रदान किया। इस सामूहिक प्रयास से न केवल पीड़ित परिवार को राहत मिली, बल्कि गांव की सामाजिक एकता भी और मजबूत हुई।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव श्रीकोट की पहचान उसकी आपसी एकता, भाईचारे और संकट के समय साथ खड़े होने की परंपरा से है। यह पहल न केवल गांव, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत है कि विपत्ति के समय पूरा गांव एक परिवार बनकर साथ खड़ा होता है।



