“संकल्प और आत्मबल से हर बाधा होगी परास्त” – स्वामी रसिक महाराज

टिहरी गढ़वाल। नरेन्द्र नगर के ग्राम खेडागाड में चल रही भागवत कथा के पांचवे दिन व्यासपीठ पर विराजमान नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि यदि आपने एक बार ठान ली तो बड़ी से बड़ी बाधाएं भी आपसे परास्त होकर चली जायेंगी ये भी भगवान श्रीकृष्ण के जीवन की प्रमुख सीखों में से एक है। कारागार में जन्म लेने वाले कृष्ण यूँ ही द्वारिकाधीश नहीं बन जाते, उसके लिए पूतना, तृणावर्त, अघासुर, बकासुर, व्योमासुर, चारूण, मुष्टिक और कंस जैसी जीवन की तमाम प्रतिकूलताओं, विघ्न-बाधाओं और बवंडरों का सदैव डटकर सामना भी करना होता है।
उन्होंने बताया कि जन्म भले कितनी ही प्रतिकूलताओं में हुआ हो लेकिन सतत प्रयास और निरंतर कुछ श्रेष्ठ करने की चाह आपको सम्राट की पदवी पर आसीन कर देती है। आपका लक्ष्य श्रेष्ठ है तो आपके प्रयास भी अतिश्रेष्ठ होने चाहिए। दृढ़ इच्छाशक्ति, उच्च आत्मबल और समर्पित भाव से अपने लक्ष्य की ओर निरंतर गति ही कारागार में जन्में उन श्रीकृष्ण की तरह हमें भी जीवन की तमाम समस्याओं से उभर कर द्वारिकाधीश बनने की प्रेरणा प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि आज के परिदृश्य को आप गौर से देखिये तो सनातन घोर संकट में है। सनातनी निंद्रा में हैं, संकीर्ण पंथों का दखल समाज में बढ़ता जा रहा है। इनसे सावधान रहने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर उत्तराखण्ड सरकार के कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने कथा में पंहुचकर व्यासपीठ का आशीर्वाद लिया। अपने संबोधन में कैबिनेट मंत्री उनियाल ने कहा कि ये क्षेत्रीय जनता का सौभाग्य है कि बालयोगी संत रसिक महाराज जी से कथा सुनने का मौका मिला है इसलिए प्रवचन को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें।
मुख्य यजमानों श्री मेहर सिंह नेगी, सोबन सिंह नेगी, कुलवीर नेगी, श्रीमती शैला देवी, विनीता देवी, रेखा देवी, मोनिका देवी, मोहन सिंह नेगी, साध्वी माँ देवेश्वरी ने तिलक लगाकर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल का कथा में पंहुचने पर स्वागत किया।