ऐतिहासिक टिहरी शहर का 210वां स्थापना दिवस: विरासत संरक्षण का लिया गया संकल्प

टिहरी गढ़वाल। ऐतिहासिक टिहरी शहर के 210वें स्थापना दिवस के अवसर पर नगर पालिका सभागार में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम दरबार ट्रस्ट एवं टिहरी बांध विस्थापित समिति के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न हुआ, जिसमें वक्ताओं ने टिहरी की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत, संस्कृति, कला, साहित्य एवं धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दरबार ट्रस्ट के संस्थापक एवं राज परिवार से जुड़े ठाकुर भवानी प्रताप पवार ने कहा कि ऐतिहासिक टिहरी हम सभी की सामूहिक विरासत है। उन्होंने नई टिहरी और देहरादून सहित अन्य स्थानों पर टिहरी की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष मोहन सिंह रावत ने कहा कि नगर पालिका का प्रयास रहेगा कि हर वर्ष ऐतिहासिक टिहरी की स्मृति में ‘त्रिवेणी कौथिक’ के रूप में सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन किया जाए, ताकि नई पीढ़ी को टिहरी के गौरवशाली इतिहास से जोड़ा जा सके।
मुख्य वक्ता महिपाल सिंह नेगी ने कहा कि टिहरी के विस्थापन के बाद जो ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरें बिखर गई हैं, उन्हें पुनः चिन्हित कर विरासत के रूप में संरक्षित किया जा सकता है। इसके लिए समाज, प्रशासन और संस्थाओं को मिलकर ठोस पहल करनी होगी।
गोष्ठी में डॉ. विकास फोंदणी, इसरार अहमद फारुकी, सभासद उर्मिला राणा, डॉ. सुशील कोटनाला, आचार्य रामकृष्ण नौटियाल, ठाकुर नरेंद्र रौथाण सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे और टिहरी की ऐतिहासिक पहचान को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि ऐतिहासिक टिहरी की विरासत केवल अतीत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक धरोहर है, जिसके संरक्षण के लिए निरंतर और संगठित प्रयास जरूरी हैं।



