टिहरी में टीबी नियंत्रण को लेकर संयुक्त कार्यशाला

टिहरी गढ़वाल। राष्ट्रीय तपेदिक उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत एनटीसीपी एवं एनटीईपी की संयुक्त क्षमता निर्माण गतिविधि का आयोजन चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, उत्तराखंड द्वारा बालाजी सेवा संस्थान के सहयोग से तथा वाइटल स्ट्रैटेजीज़, नई दिल्ली के तकनीकी समर्थन से किया गया।
कार्यक्रम जिला क्षय रोग अधिकारी के तत्वावधान में सीएमओ कार्यालय, टिहरी के मीटिंग हॉल में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य टीबी के उपचार में तंबाकू छोड़ने के उपायों को प्रभावी ढंग से शामिल करना और टीबी रोगियों के उपचार परिणामों को बेहतर बनाना रहा।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं वक्ताओं के रूप में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. जीतेन्द्र भंडारी, सीपीएम डॉ. हेमंत खर्कवाल तथा सीपीओ योगेश कुमार उपस्थित रहे।
वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि टीबी उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने के लिए तंबाकू नियंत्रण को टीबी उपचार की नियमित प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि रोगी-केंद्रित और समन्वित प्रयासों से ही स्थायी एवं सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। वक्ताओं ने यह भी बताया कि धूम्रपान करने वालों में टीबी होने का खतरा अधिक होता है और टीबी से होने वाली मौतों में तंबाकू सेवन एक प्रमुख कारण है।
कार्यक्रम में बालाजी सेवा संस्थान के कार्यकारी निदेशक श्री अवधेश कुमार ने तंबाकू नियंत्रण के क्षेत्र में संस्थान द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी दी। वहीं, डॉ. रीना ने कार्यशाला के दौरान तंबाकू उपयोगकर्ताओं को दिए गए परामर्श से संबंधित आंकड़ों की प्रस्तुति की। इसके अलावा डॉ. सोनम गुप्ता एवं डॉ. श्रेया कौल ने ब्रिफ एडवाइस प्रोटोकॉल की विस्तृत व्याख्या करते हुए स्वास्थ्य कर्मियों को व्यवहारिक मार्गदर्शन दिया।
श्री अजीत जस्सर ने बताया कि तंबाकू सेवन टीबी के लिए एक प्रमुख जोखिम कारक है। ऐसे में राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के प्लेटफॉर्म का रणनीतिक उपयोग कर न केवल टीबी रोगियों बल्कि व्यापक समुदाय के स्वास्थ्य परिणामों में भी सुधार लाया जा सकता है। यह सहयोगात्मक मॉडल टीबी रोगियों को समग्र देखभाल प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगा।
कार्यक्रम में यह भी स्पष्ट किया गया कि एनटीसीपी एवं एनटीईपी मिलकर टीबी-मुक्त भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। इस पहल का व्यापक जनहित प्रभाव होगा, जिससे एक ओर टीबी रोगियों की उपचार सफलता दर बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर समाज में तंबाकू सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों में भी कमी आएगी। अंतिम लक्ष्य टीबी की रोकथाम और तंबाकू नियंत्रण को नियमित स्वास्थ्य सेवाओं में एकीकृत कर भारत को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाना है।



