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सनातन संस्कृति चिंतन शिविर से धर्म व शिक्षा के नवजागरण का संदेश

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शिक्षा केवल ज्ञान नहीं, राष्ट्र निर्माण का माध्यम : स्वामी रसिक महाराज

प्रयागराज, 15 जनवरी। माघ मेला क्षेत्र झूंसी, प्रयागराज में आयोजित द्विदिवसीय सनातन संस्कृति जागरण चिंतन शिविर का समापन “उठो, जागो और जगाओ” के संदेश के साथ संपन्न हो गया। शिविर में देश-विदेश से आए विभिन्न सम्प्रदायों के धर्माचार्यों, लेखकों और समाजसेवियों ने सनातन धर्म व संस्कृति की वर्तमान दिशा-दशा पर गंभीर विमर्श किया।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए सनातन धर्म विकास परिषद के प्रदेश अध्यक्ष एवं नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि यह चिंतन शिविर देश में धर्म और शिक्षा के पुनर्जागरण की मजबूत शुरुआत है। उन्होंने कहा कि सनातन शिक्षा के क्षेत्र में नीति निर्माण, सुधार और नवाचार के लिए यह शिविर एक सार्थक मंच सिद्ध हुआ है।
स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान का प्रसार नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, दृष्टिकोण और राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम है। भारत की युवा शक्ति को देश की सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे युवाओं को सही दिशा दें, उनके कौशल को निखारें और उन्हें राष्ट्र निर्माण से जोड़ें।
उन्होंने विश्वविद्यालयों से गुणवत्तापरक शिक्षा, नवाचार और शोध पर विशेष ध्यान देने का आह्वान करते हुए कहा कि 21वीं सदी को भारत की सदी बनाने के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों को विश्व स्तरीय प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तैयार करना होगा। साथ ही उच्च शिक्षा में भारतीयता, संस्कृति और नैतिक मूल्यों के समावेश पर भी उन्होंने जोर दिया।
स्वामी रसिक महाराज ने कौशल आधारित शिक्षा को समय की मांग बताते हुए कहा कि विद्यार्थी रोजगार खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजक बनें। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों से “नशा मुक्त कैंपस” की दिशा में ठोस कदम उठाने की अपील की और कहा कि अनुशासित व स्वस्थ परिसर ही श्रेष्ठ शिक्षा की नींव होते हैं।
शिविर में सामाजिक समरसता, धार्मिक एकता और सांस्कृतिक चेतना से जुड़े 10 महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। इस अवसर पर स्वामी विज्ञानानंद (जम्मू-कश्मीर), डॉ. अद्वैतानंद सरस्वती (राजस्थान), स्वामी प्रज्ञानंद (महाराष्ट्र), स्वामी अवधेशानंद सरस्वती (गुजरात), डॉ. प्रणव भारतीय (हैदराबाद), स्वामी शिवानंद सरस्वती (उत्तराखंड), डॉ. विशुद्धानंद (पंजाब), लेखक अतुल विस्मरणीय (केरल) सहित दो हजार से अधिक संत-महात्मा, लेखक और चिंतक उपस्थित रहे।


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Govind Pundir

*** संक्षिप्त परिचय / बायोडाटा *** नाम: गोविन्द सिंह पुण्डीर संपादक: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल टिहरी। उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार। पत्रकारिता अनुभव: सन 1978 से सतत सक्रिय पत्रकारिता। विशेषता: जनसमस्याओं, सामाजिक सरोकारों, संस्कृति एवं विकास संबंधी मुद्दों पर गहन लेखन और रिपोर्टिंग। योगदान: चार दशकों से अधिक समय से प्रिंट व सोशल मीडिया में निरंतर लेखन एवं संपादन वर्तमान कार्य: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान करना।

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