मिंगवाली में जल संरक्षण एवं जल जनित रोगों पर कार्यशाला, 110 लोगों ने लिया हिस्सा
टिहरी गढ़वाल, 24 मई। कृषि प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (IATR) द्वारा उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) के सहयोग से विकास खंड जाखनीधार की ग्राम पंचायत मिगवाली स्थित स्वामी मनमथन सभागार में “जल स्रोत पुनर्जीवन, जल गुणवत्ता एवं जल जनित रोग” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में जनप्रतिनिधियों, महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्घाटन पर्यावरणप्रेमी एवं टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय ने किया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण को कार्बन क्रेडिट से जोड़ना समय की आवश्यकता है। यदि पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी बचानी है तो जल स्रोतों का संरक्षण अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के माध्यम से ग्रामीणों को भविष्य में कार्बन क्रेडिट के जरिए अतिरिक्त आय के अवसर भी प्राप्त हो सकते हैं।
कार्यशाला में विशेषज्ञ वक्ता डॉ. प्रशांत मंगाई ने जल जनित रोगों पर विस्तार से जानकारी देते हुए दूषित पानी से फैलने वाली बीमारियों, उनके लक्षणों तथा बचाव के उपायों पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्वच्छ पेयजल के महत्व को रेखांकित करते हुए लोगों से जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने की अपील की।इसके बाद श्री राजेंद्र थपलियाल ने जल स्रोत संरक्षण से जुड़ी तकनीकी जानकारियां साझा कीं। उन्होंने वर्षा जल संग्रहण, चाल-खाल निर्माण, पारंपरिक नौलों एवं धारों के पुनर्जीवन तथा जल संरक्षण टैंकों के निर्माण की उपयोगी विधियों को सरल भाषा में समझाया।
कार्यक्रम के अंत में कृषि प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने UCOST, सभी वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संस्थान जल संरक्षण को ग्रामीण आजीविका से जोड़ने की दिशा में लगातार कार्य करता रहेगा।
कार्यशाला में सात ग्राम पंचायतों के प्रधान, तीन क्षेत्र पंचायत सदस्य, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं तथा कोटी क्षेत्र की महिलाओं सहित कुल 110 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। समापन अवसर पर सभी ने जल संरक्षण की शपथ भी ली।




