पांच वर्षों में 10.35 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता, गौपालन से लेकर बकरी, भेड़ और ब्रॉयलर फार्म तक योजनाओं का लाभ
टिहरी गढ़वाल 30 सितंबर, 2026। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को स्वरोजगार और आय का मजबूत माध्यम बनाने के संकल्प के तहत जनपद में पशुपालन विभाग की विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जा रहा है।
वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक इन योजनाओं के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को कुल 10 करोड़ 35 लाख 23 हजार 141 रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। योजनाओं के जरिए ग्रामीणों को गौपालन, बकरी पालन, भेड़ पालन, महिला बकरी पालन, ब्रॉयलर फार्म और गोट वैली जैसी गतिविधियों से जोड़कर स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. डी.के. शर्मा ने कहा कि पशुपालन विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को आय के स्थायी साधन उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। योजना के तहत चयनित लाभार्थियों को पशुधन इकाई स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने के साथ ही पशुओं की देखभाल, प्रबंधन एवं इकाई संचालन से संबंधित आवश्यक जानकारी भी दी जा रही है। इसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को पशुपालन गतिविधियों से जोड़कर उनकी आमदनी के अतिरिक्त स्रोत विकसित करना है।उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में एससीपी गौपालन योजना के तहत 412 लाभार्थियों को लगभग 1.48 करोड़ रुपये, जबकि टीएसपी गौपालन योजना के तहत 41 पशुपालकों को 14.76 लाख रुपये की सहायता दी गई। इसी प्रकार सामान्य वर्ग बकरी पालन योजना में 157 लाभार्थियों को 98.91 लाख रुपये, एससीपी बकरी पालन योजना में 278 लाभार्थियों को 1.75 करोड़ रुपये तथा टीएसपी बकरी पालन योजना में 23 लाभार्थियों को 14.49 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई।एससीपी भेड़ पालन योजना के तहत 166 लाभार्थियों को 1.04 करोड़ रुपये तथा टीएसपी के अंतर्गत भेड़ पालन योजना में 17 लाभार्थियों को 10.71 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई है। वहीं महिला बकरी पालन योजना के तहत 200 लाभार्थियों को 70 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई।पशुपालन विभाग की मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन योजना के तहत 308 लाभार्थियों को लगभग 34.21 लाख रुपये, ब्रॉयलर फार्म योजना के तहत 440 लाभार्थियों को 1.56 करोड़ रुपये तथा गोट वैली योजना के तहत 437 लाभार्थियों को लगभग 2.08 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है।मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि इन योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के साधन उपलब्ध कराना है। पशुपालन इकाइयों की स्थापना से ग्रामीणों को दूध, मांस और अंडा उत्पादन जैसी गतिविधियों से नियमित आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है। विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है।उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा पात्र लाभार्थियों को योजनाओं से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और अन्य पात्र परिवारों को पशुपालन क्षेत्र में स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर उनकी आय बढ़ाने के साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।




