शहर से गांव तक शुभकामना पोस्टरों के जरिए दर्ज कराई मौजूदगी, 2027 के टिकट की दावेदारी को लेकर चर्चाएं तेज
टिहरी गढ़वाल 3 नवम्बर । टिहरी विधानसभा में वर्ष 2027 के चुनाव की सियासी बिसात बिछने लगी है। भाजपा के भीतर संभावित प्रत्याशियों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अब सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय भाजपा एनजीओ प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक सुशील बहुगुणा का नाम भी संभावित दावेदारों की फेहरिस्त में शामिल होता दिखाई दे रहा है। दीपावली से लेकर नववर्ष 2027 तक की शुभकामनाओं के पोस्टरों के जरिए शहर से ग्रामीण क्षेत्रों तक उनकी बढ़ती दृश्य उपस्थिति ने स्थानीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।
टिहरी विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न प्रमुख स्थानों पर लगाए गए पोस्टरों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के चित्रों के साथ सुशील बहुगुणा की तस्वीर प्रमुखता से नजर आ रही है। त्योहारों की शुभकामनाओं के बहाने क्षेत्र के मतदाताओं तक पहुंच बनाने की इस पहल को राजनीतिक हलकों में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अपनी दावेदारी मजबूत करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
बहुगुणा की राजनीतिक सक्रियता को केवल पोस्टरों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। हाल ही में उन्होंने पार्टी संगठन से जुड़े पदाधिकारियों के समक्ष टिहरी विधानसभा से चुनाव लड़ने की अपनी इच्छा और संभावित दावेदारी का पक्ष भी रखा था। ऐसे में सार्वजनिक कार्यक्रमों और सामाजिक अभियानों के साथ क्षेत्र में उनकी बढ़ती सक्रियता को चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
सामाजिक क्षेत्र में सुशील बहुगुणा की पहचान ‘शराब नहीं, संस्कार दो’ अभियान के प्रणेता के रूप में रही है। नशामुक्त गांव, नशामुक्त विवाह, पर्यावरण संरक्षण और जनजागरूकता जैसे मुद्दों पर उनके अभियान लगातार चर्चा में रहे हैं। हाल ही में न्यू टिहरी प्रेस क्लब में आयोजित दीपावली मिलन समारोह में भी उन्होंने अपने अभियान में मीडिया की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए पत्रकारों का आभार जताया था।
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो टिहरी विधानसभा में भाजपा के भीतर संभावित दावेदारों की संख्या बढ़ने के साथ टिकट को लेकर प्रतिस्पर्धा भी दिलचस्प होती जा रही है। हालांकि, सुशील बहुगुणा की दावेदारी को लेकर अभी पार्टी संगठन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और न ही प्रत्याशी चयन को लेकर कोई निर्णय हुआ है।
फिलहाल शुभकामना पोस्टरों के जरिए बहुगुणा की क्षेत्रव्यापी मौजूदगी ने सियासी चर्चाओं को जरूर हवा दे दी है। सवाल यह है कि क्या सामाजिक अभियानों के सहारे अपनी पहचान बनाने वाले बहुगुणा आगामी चुनाव में भाजपा के मजबूत दावेदार के रूप में उभर पाएंगे या उनकी यह सक्रियता संभावित चुनावी दावेदारी तक ही सीमित रहेगी? इसका जवाब आने वाले दिनों में पार्टी की गतिविधियों और राजनीतिक समीकरणों से ही मिलेगा।




