अनुप्रास अलंकार’ में : ‘म’ से ‘माँ’

Garhninad Desk
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मृत्युंजय मनुष्यता मेरी माँ
मंगलगीत मज़बूत मेरी माँ!
मैं मुख मन्थन मधु!
मधुर मंगल मृदुल माँ!
मानस महन्त मातृत्व महिमा!
मुख्य मग मार्गदर्शक महान!
मानव मेरा महत्व मान!
मुझसे मोह माया मुक्ति!
मंज़िल मज़हब मोहब्बत मस्ती
मिलती मनोहर मज़ेदार ममता!
मनुष्य मानो मुझे महकता!
मर्म महक मीठा मरहम!
माता माई मईया मम!
मन-माँझी महाकाव्य महतारी!
मत मार्मिक मणि मतारी!
महामंत्र मख मठरी माँ!
मिट्टी मतलब मेरी माँ!
मतभेद मिटाती मेरी माँ!
मधुपर्क मधुमय मयुखी मनुजा !
मनोभूमि मसि मार्तंड मुनिजा!
मर्ष महि महेरी माँ!
मेंड़ मंजरी मेरी माँ!
मातु मंगलमय मंजिमा महिला
माननीय मंत्र मंत्रणा मंदाकिनी!
मंच मचान मदरसा मंदिर
मज़ार मजाज़ी मर्यादा मानिनी!
मानवीय मशाल मकान मालिकिन
मिलनसार मार्गदर्शिका मुखर मुदर्रिस!
मुकरी मुक्तक मीमांसा मुमतहिन
मुहसिन मुल्क मेधा मुस्तग़ीस!
मेरी मुक्ति मेरी माँ!
मेरी मति मेरी माँ!

-गोलेन्द्र पटेल

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