टिहरी की ऐतिहासिक क्रान्ति के महानायक थे श्रीदेव सुमन -रसिक महाराज

हरिद्वार। महापुरुष प्रत्येक युग की मांग होते हैं। युग को अपने विचारों से प्रभावित करके समाज में नवीन चेतना का संचार करते हैं। अधर्म, अन्याय, अत्याचार का विरोध करके जन समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना करते हैं। इसी प्रकार श्रीदेव सुमन ने भी इस धरा में जन्म लेकर अन्याय और अत्याचार के खिलाफ बिगुल बजाकर चेतना पुंज का कार्य किया।
श्रीदेव सुमन महान अमर बलिदानी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और टिहरी की ऐतिहासिक क्रांति के महानायक का नाम है। उक्त सदविचार नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने नृसिंह वाटिका आश्रम खांड गांव नम्बर एक में
” चेतना पुंज श्रीदेव सुमन ” कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए ।
उन्होंने बताया कि श्रीदेव सुमन का जन्म टिहरी जिले के विकासखण्ड चंबा के जौल गांव में 25 मई 1916 को हुआ था। इनकी माता का नाम तारादेवी और पिता का नाम हरिराम बडोनी था। श्रीदेव सुमन ने 14 वर्ष की छोटी सी उम्र में ‘नमक सत्याग्रह’ में भाग लिया। जिस पर उन्हें 15 दिनों के लिए जेल भेज दिया गया। लेकिन इससे उनका उत्साह कम नहीं हुआ। 1939 में ‘टिहरी राज्य प्रजा मंडल’ की स्थापना हुई और सुमन जी इसके मंत्री बनाए गए।
1942 के ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में वे 15 दिन जेल में रहे। 21 फरवरी 1944 को उन पर राजद्रोह का मुकदमा ठोक कर भारी आर्थिक दंड लगा दिया गया। लेकिन अविचलित रहते हुए अपना मुकदमा स्वयं लड़ा और अर्थदंड की बजाए जेल जाना स्वीकार किया। जिस पर उन्हें काल कोठरी में ठूंसकर भारी-भरकम हथकड़ी व बेड़ियों में कस दिया गया। उन्हें जानबूझ कर खराब खाना दिया जाता था। बार-बार कहने पर भी कोई सुनवाई न होती देख 3 मई 1944 को उन्होंने आमरण अनशन शुरू कर दिया। 84 दिन बाद 25 जुलाई 1944 को जेल में ही उन्होंने शरीर त्याग दिया। जेलकर्मियों ने रात में ही उनका शव एक कंबल में लपेट कर भागीरथी और भिलंगना नदी के संगम स्थल पर फेंक दिया।
सरकार से पाठ्यक्रम में श्रीदेव सुमन की जीवनी शामिल करने की मांग करते हुए स्वामी रसिक महाराज ने विवि के स्नातक पाठ्यक्रम में श्रीदेव सुमन के व्यक्तित्व और कृतित्व को शामिल कर किया जाय , जिससे युवा पीढ़ी उनके जीवन से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ सके। कार्यक्रम में साध्वी मां देवेश्वरी जी , विमला भंडारी , रेखा डंगवाल , शकुंतला मनवाल , सुनीता रावत , प्रो दिनेश व्यास , शांति भूषण गोदियाल , डॉ अरुण वशिष्ठ, सत्यपाल सिंह एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे ।