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उत्तराखंड विधानसभा में ध्वनिमत से पास हुआ समान नागरिक संहिता विधेयक,जल्द बनेगा कानून

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समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना उत्तराखंड

देहरादून 7 फरवरी 2024। उत्तराखंड विधानसभा में ध्वनिमत से पास हुआ समान नागरिक संहिता विधेयक। विधानसभा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अगुवाई में समान नागरिकता संहिता विधेयक ध्वनिमत से पास हो गया है।अब उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
उत्तराखंड विधानसभा में बुधवार को समान नागरिकता संहिता विधेयक को ‘वंदे मातरम’ और ‘जय श्री राम’ के नारों के साथ विधानसभा में पेश किया गया था। विधेयक की खास बात यह भी है किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति में माता-पिता के अलावा उसकी पत्नी और बच्चों को समान अधिकार का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा संपत्ति बंटवारे में लड़की का समान हक सभी धर्मों में लागू होगा। किसी अन्य धर्म या जाति में विवाह करने पर भी लड़की के अधिकारों का हनन नहीं होगा और सभी धर्मों में विवाह की आयु लड़की के लिए 18 वर्ष अनिवार्य होगी, जबकि लड़कों की उम्र 21 वर्ष कर दी गई है। यूसीसी बिल पास होने के बाद अब इसे राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। राज्यपाल के दस्तखत होते ही ये कानून बन जाएगा। इससे राज्य के सभी लोगों पर समान कानून लागू हो जाएंगे। हालांकि, अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लोगों पर इसके प्रावधान लागू नहीं होंगे।
आपको बता दें कि समान नागरिक संहिता का वादा बीजेपी ने 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान किया था। धामी की सरकार बनने के बाद इसे लेकर समिति बनाई गई थी। इसके बाद समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। विधेयक में शादी, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने का अधिकार, लिव-इन रिलेशनशिप,शादी रजिस्ट्रेशन पर विस्तार से नियम बनाए गए हैं।
जानकारों का कहना है कि इस बिल के लागू होने के बाद उत्तराखंड में शादी के अन्य सभी कानून, रूढ़ियां या प्रथाएं खुद ही निष्प्रभावी हो जाएंगी। यह कानून राज्य से बाहर रहने वाले उत्तराखंड के सभी नागरिकों पर भी लागू होगा। अनुसूचित जनजाति (ST) के लोगों और समूहों पर यह कानून लागू नहीं होगा।


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