कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा: भीमल व जूट रेशों पर आधारित हस्तशिल्प कार्यशाला का समापन

टिहरी गढ़वाल | 10 जनवरी । राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के अंतर्गत कौशल आधारित, व्यावहारिक एवं स्थानीय संसाधनों से जुड़ी शिक्षा को प्रोत्साहित करने की दिशा में संस्थान में आयोजित प्राकृतिक रेशों पर आधारित हस्तशिल्प कार्यशाला का आज सफल समापन हुआ।

कार्यशाला में जनपद टिहरी गढ़वाल के वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) के तहत भीमल के रेशों से विभिन्न उपयोगी व सजावटी उत्पाद विकसित करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रशिक्षुओं में स्थानीय प्राकृतिक रेशों से हस्तशिल्प निर्माण की दक्षता विकसित करना, स्वरोजगार के अवसर सृजित करना तथा वोकल फॉर लोकल की अवधारणा को सशक्त बनाना रहा। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को भीमल, जूट एवं अन्य प्राकृतिक रेशों से टोकरी, फ्लावर पॉट, वॉल हैंगिंग, टी-कोस्टर, डोंगा मैट, ट्रे, रस्सियां, दैनिक उपयोग के बैग तथा स्लीपर आदि बनाने की तकनीकें सिखाई गईं।
कार्यशाला में भारतीय ग्रामोथान संस्था, ढालवाला (ऋषिकेश) की विशेषज्ञ प्रशिक्षक श्रीमती बीना पुंडीर एवं श्रीमती विमला चौहान ने प्रतिभागियों को मार्गदर्शन प्रदान किया। प्रशिक्षण के प्रति विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
समापन अवसर पर संस्थान के प्रभारी प्राचार्य श्री देवेंद्र सिंह भंडारी ने दोनों संदर्भदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए प्रतिभागियों से सीखी गई तकनीकों का नियमित अभ्यास करने और इन्हें स्वरोजगार से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों के कौशल विकास के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करती हैं।
कार्यक्रम में कार्यक्रम समन्वयक सीमा शर्मा सहित डॉ. वीर सिंह रावत, डॉ. सुमन नेगी, डॉ. राजकिशोर, निर्मला सिंह, राजेंद्र बडोनी, विनोद पेटवाल, सुधीर नौटियाल समेत अन्य शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।



