शक्ति का समुचित सदुपयोग ही पुरुषार्थ है- स्वामी रसिक महाराज

देहरादून 26 जनवरी । मां ज्वाल्पा देवी कीर्तन मण्डली द्वारा शिव रघुनाथ मंदिर क्लेमनटाउन में आयोजित नौ दिवसीय देवी भागवत कथा एवं आशीर्वाद कवच महायज्ञ के दूसरे दिन व्यासपीठ पर विराजमान नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि शक्ति से ही मनुष्य पहले धर्म प्राप्त करता है, पुनः उसी से अर्थ सिद्ध करते हुए पुण्य संचय करके कामनाओं की पूर्ति करने में समर्थ होता है, अंत में इसी शक्ति से पूर्ण त्याग एवं ज्ञान के द्वारा मोक्ष पा जाता है। अपनी शक्ति के प्रवाह का समुचित प्रयोग करना ही पुरुषार्थ है। इस प्रकार, शक्ति संपन्नता को स्वार्थसिद्धि के विरुद्ध दूसरों के हित में लगाते रहना ही उन्नति-पथ पर बढ़ते जाना है।
कदाचित हमारा जीवन सद्गुणों और सद्भावों से रहित है तो हम शक्ति के सदुपयोग से किसी भी प्रकार के अभाव को दूर कर तुच्छ, अकिंचन से महान हो सकते हैं।
देह, प्राण, इंद्रियाँ, मन और बुद्धि के द्वारा दुरुपयोगित शक्ति का सदुपयोग होने के लिए ही पूजा-पाठ, कीर्तन, जप, तप और ध्यान आदि अनेक साधनों का आश्रय लेना पड़ता है।
जिस प्रकार हमारा यह भौतिक शरीर क्षेत्र इसी भूलोक के द्रव्यों से बना हुआ है, उसी प्रकार हमारे प्राणमय, मनोमय और विज्ञानमय क्षेत्र उत्तरोत्तर सूक्ष्मातिसूक्ष्म लोकों के द्वारा निर्मित है।प्रत्येक क्षेत्र में भिन्न-भिन्न प्रकार की शक्ति है और अपने-अपने लोकों की दिव्यशक्ति को लेकर प्रत्येक क्षेत्र क्रियाशील हो रहा है। जिस क्षेत्र में क्रिया की प्रधानता रहती है, वही क्षेत्र विशेष शक्ति संपन्न होता है। आज कथा में आचार्य दामोदर नौडियाल, , साध्वी मां देवेश्वरी, संतोष विष्ट, रविन्द्र विष्ट, जगमोहन रावत, मीना रावत, करन नेगी, दमयंती जुयाल, अनीता जदली, नरेंद्र कोटनाला एवं बड़ी संख्या में सनातनी भक्त उपस्थित रहे।



