नई टिहरी में अतिक्रमण शमन पर नीति और प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल
टिहरी गढ़वाल 8 जनवरी 2026। नई टिहरी शहर, पुनर्वास स्थलों एवं अन्य क्षेत्रों में अतिक्रमित भूमि एवं भवनों के शमन (Mitigation) को लेकर जारी प्रशासनिक पत्राचार के बाद इस विषय पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।
उत्तराखंड कांग्रेस के प्रवक्ता शांति प्रसाद भट्ट ने इस संबंध में पुनर्वास नीति और लागू नियमों को लेकर कई प्रश्न उठाए हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता के अनुसार गढ़वाल मंडल आयुक्त द्वारा जिलाधिकारी टिहरी को भेजे गए पत्र में नई टिहरी शहर में आवंटित भूमि से अतिरिक्त अतिक्रमण के मामलों को समन्वय समिति की बैठक में रखने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान पुनर्वास नीति और राज्य सरकार की एक बार समाधान योजना-2021 में ऐसे अतिक्रमण को शमन करने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।

भट्ट ने यह भी कहा कि अतिक्रमण से संबंधित बड़ी संख्या में प्रकरण आयुक्त न्यायालय में लंबित हैं तथा कई मामलों में न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश (स्टे) दिया गया है। ऐसे में शमन की प्रक्रिया लागू करने से पहले विधिक स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।
उन्होंने पूर्व पुनर्वास नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस शासनकाल में विस्थापितों को कृषि भूमि, आवासीय भूखंड एवं रोजगार से जुड़ी सुविधाएं प्रदान की जाती थीं, जिनमें बाद के वर्षों में बदलाव किए गए। कांग्रेस प्रवक्ता के अनुसार एक बार समाधान योजना-2021 में सरकारी या निकाय भूमि पर अतिक्रमण को शमन के दायरे से बाहर रखा गया है, जिससे नई टिहरी जैसे नियोजित नगर में इसके क्रियान्वयन को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
कांग्रेस ने सरकार से पुनर्वास नीति और शमन से संबंधित योजनाओं की विधिक समीक्षा एवं आवश्यक संशोधन कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।



